प्लस टू विद्यालयों में साइंस लैब का हाल-कहीं संसाधनों की कमी, तो कहीं व्यवस्था बदहाल

Feb 19, 2026 01:38 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, कोडरमा
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कभी भी सही से नहीं होता प्रैक्टिकल कोडरमा, हिन्दुस्तान टीम कोडरमा जिले के सभी स्कूलों में साइंस लैब दुरुस्त होने का दावा जिले के शिक्षा विभाग के अधि

प्लस टू विद्यालयों में साइंस लैब का हाल-कहीं संसाधनों की कमी, तो कहीं व्यवस्था बदहाल

कोडरमा, हिन्दुस्तान टीम कोडरमा जिले के सभी स्कूलों में साइंस लैब दुरुस्त होने का दावा जिले के शिक्षा विभाग के अधिकारियों की ओर से किया जा रहा है। कोडरमा के जिला शिक्षा पदाधिकारी अविनाश राम दावा करते हैं कि जिले के सभी स्कूलों में साइंस लैब है। यहां बच्चे आराम से प्रयोग करते हैं। कोई असुविधा नहीं होती। मगर सच्चाई इससे बिल्कुल अलग और बदहाल है। आलम यह है कि बच्चों को विज्ञान सीखने की बात कही जाती है, मगर उनको वैज्ञानिक बनाने की पहली सीढ़ी स्कूलों से शुरू होती है, जहां बच्चे प्रयोग करते हैं। कोडरमा जिले के विभिन्न प्रखंडों में संचालित प्लस टू विद्यालयों में विज्ञान प्रयोगशालाओं की स्थिति अलग-अलग नजर आ रही है।

कहीं प्रयोगशाला के अभाव में छात्र-छात्राएं प्रायोगिक शिक्षा से वंचित हैं, तो कहीं संसाधनों के बावजूद बिजली व शिक्षकों की कमी बाधा बन रही है। मरकच्चो प्रखंड में पांच प्लस टू विद्यालय संचालित हैं। इनमें उत्क्रमित प्लस टू उच्च विद्यालय डगरनवा में विज्ञान प्रयोगशाला नहीं है। प्रधानाध्यापक अरविंद कुमार यादव ने बताया कि विद्यालय में न तो साइंस लैब है और न ही पर्याप्त उपकरण उपलब्ध हैं। जो सीमित उपकरण हैं, उन्हें कक्षा के बेंच पर रखकर ही छात्रों को प्रायोगिक जानकारी दी जाती है, जिससे उन्हें काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। सर्वोदय प्लस टू उच्च विद्यालय के लैब टेक्नीशियन ने बताया कि अधिकांश उपकरण उपलब्ध हैं, शेष की मांग की गई है। अनियमित बिजली आपूर्ति लैब संचालन में परेशानी उत्पन्न करती है। चंदवारा प्रखंड में भी पांच प्लस टू विद्यालय संचालित हैं। पिपराडीह विद्यालय में विज्ञान विषय की पढ़ाई नहीं होने से प्रयोगशाला नहीं है। वहीं बेंदी विद्यालय को हाल ही में प्लस टू का दर्जा मिला है, लेकिन यहां न तो पीजीटी शिक्षकों के पद सृजित हुए हैं और न ही विज्ञान प्रयोगशाला स्थापित की गई है। छात्रों ने बताया कि 12वीं में नामांकन के बावजूद प्रयोगशाला के अभाव में उन्हें प्रायोगिक ज्ञान नहीं मिल पा रहा है। इस संबंध में बीपीओ विजय कुमार बर्णवाल ने बताया कि पीजीटी शिक्षकों की नियुक्ति के बाद ही प्रयोगशाला की स्थापना संभव होगी। इस प्रकार जिले में विज्ञान शिक्षा की गुणवत्ता प्रयोगशालाओं की उपलब्धता और संसाधनों पर निर्भर दिख रही है। जहां सुविधाएं उपलब्ध हैं, वहां छात्रों को प्रायोगिक लाभ मिल रहा है, जबकि संसाधनों के अभाव वाले विद्यालयों में विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित हो रहा है।

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