ठंड से ठिठुरी मजदूरों की उम्मीद, नहीं मिल रहा काम, लौट रहे गांव

Jan 08, 2026 08:26 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, कोडरमा
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झुमरीतिलैया में ठंड के कारण दिहाड़ी मजदूरों को काम नहीं मिल रहा है। मजदूर रोज़ सुबह काम की तलाश में निकलते हैं, लेकिन निराश होकर लौटते हैं। मौसम की मार और बिना किसी मदद के, उनकी स्थिति बेहद खराब है। कई मजदूरों का कहना है कि घरवालों को बताना मुश्किल हो रहा है कि यहाँ काम नहीं मिल रहा।

 ठंड से ठिठुरी मजदूरों की उम्मीद, नहीं मिल रहा काम, लौट रहे गांव

कोडरमा, वरीय संवाददाता झुमरीतिलैया शहर के पुराना बस स्टैंड। घना कोहरा है। पारा भी करीब सात डिग्री पर है। ठंडी हवा सीधे हड्डी तक पहुंच रही है। इस हाड़ कपाने वाली ठंड में पेट की आग बुझाने मजदूर रोड किनारे खड़े हैं। कुछ बैठे भी हैं। उन्हें काम पर ले जाने वालों की तलाश है। किसी की गाड़ी रुकती है तो लगता है आज काम मिल जाएगा। दौड़ कर पूछते हैं क्या काम है बाबू... लेबर चाहिए का। जवाब आता है कि नहीं उन्हें किसी मजदूर की तलाश नहीं। इतना सुनते ही एक बार फिर सबों के चेहरे पर हताशा। यह हाल किसी एक झुमरीतिलैया पुराना बस स्टैंड का नहीं है।

ऐसे ही दर्जनों मजदूर शहर में दूसरी जगह भी काम की तलाश में रोजाना आते हैं और काम नहीं मिलने पर निराश होकर लौट जाते हैं। मजदूरों को काम देने वाले इस चौराहा पर मजदूरों की बेबसी सर्दी के सितम की कहानी कह रही है। पहाड़पुर से आए मनोज, कौशिक, हरेंद्र के अलावा करण कहते हैं कि रोजाना सुबह आठ बजे पहुंच जाते हैं। लेकिन, काम नहीं मिल रहा। कहते हैं कि घरवालों को बताना मुश्किल हो रहा है कि यहां काम नहीं मिल रहा। घरवालों को लग रहा है कि जब हम घर लौटेंगे तो उनके साथ कमाई होगी, कुछ पैसे लेकर जाएंगे। लेकिन यहां तो एक सप्ताह से बोहनी भी नहीं हुई। आकाश रोजाना परसाबाद से झुमरीतिलैया पहुंचते हैं। सुबह से दोपहर तक काम पर ले जाने वालों की तलाश करते हैं। बताते हैं कि ठंड के कारण काम बंद है। काम नहीं मिल रहा। कोई मदद भी नहीं। पेट की आग के लिए ऐसे कनकनी उनके लिए कुछ नहीं है। हिन्दुस्तान से बातचीत के दौरान मजदूर बताते हैं कि पहले यहां रोजाना काम मिल जाता था। कनकनी के कारण अब कोई ले जाने को नहीं आ रहा। मजदूरों को आशा है कि दो-तीन दिनों में मौसम में सुधार होगा और उन्हें काम मिलेगा। पेट के भूख की व्यवस्था होगी। कड़ाके की ठंड से मुश्किल में पड़े हैं दिहाड़ी मजदूर कोडरमा और झुमरीतिलैया में दिहाड़ी मजदूरों के सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया है। शहर के सीएच स्कूल के पास खड़े कुछ मजदूर कहते हैं कि गांव में सर्दी से बचने के लिए न तो अलाव की व्यवस्था है और न कंबल का वितरण हुआ है। सुबह देर तक ठंड और कुहासे के चलते घर से निकलना मुश्किल है। ऐसे में काम क्या मिलेगा। मौसम बना रहा बीमार मुआवजे की दरकार रोजाना गांव से शहर को आने वाले मजदूर बैरंग लौट रहे। उनकी सेहत खराब हो रही। कभी सरकारी तो कभी गांव के डॉक्टर की दवा से काम चल रहा। वे बताते हैं कि नहीं कमाएंगे तो खाएंगे क्या। आखों के सामने परिवार चलाने की जिम्मेवारी दिखायी देती है। काम नहीं करेंगे तो परिवार का गुजारा नहीं होगा। मजदूरों के लिए कुछ व्यवस्था होनी चाहिए। काम नहीं मिलने पर मुआवजा मिलना चाहिए।

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