JPSC-CGL पर नया खुलासा: एजेंट लाते कैंडिडेट, पैसे लेकर सेटिंग; फिर OMR शीट में होती थी टेंपरिंग

लाइव हिन्दुस्तान, रांची
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जेपीएससी-सीजीएल पेपर लीक पर सीआईडी की जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। श्वेता और अभय तिवारी के कहने पर एजेंट अभ्यर्थियों से संपर्क करते। पूरी सेटिंग होने के बाद ओएमआर शीट पर टेंपरिंग होती थी।

JPSC CGL Paper Leak New Revelation
JPSC-CGL पेपर लीक पर सीआईडी की जांच में नया खुलासा

JPSC-CGL Paper Leak: झारखंड जेपीएससी-सीजीएल मामले में सीआईडी की जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। परीक्षा गड़बड़ी में गिरफ्तार मो. एबाद ने चौंकाने वाले खुलासे किए। एबाद के बयान के अनुसार, परीक्षा उप-नियंत्रक रहीं श्वेता और अभय तिवारी के निर्देश पर ही एजेंट अभ्यर्थियों से संपर्क करते थे। पूरी सेटिंग होने के बाद ओएमआर तथा ओएसएम में टेंपरिंग एवं मैनिपुलेशन का काम किया जाता था।

मूलतः उत्तर प्रदेश के अयोध्या जिले के रोनाही गांव निवासी मो.एबाद ने बताया कि जुलाई 2023 में वह पिकार टेक्नोलॉजी प्रालि में टेक्निकल सपोर्ट के तौर पर मात्र 12,500 रुपए मासिक वेतन पर कार्यरत था। बाद में कंपनी के निदेशक मो. उस्मान, जो टीडीपीएल कंपनी के अंतर्गत जेपीएससी कार्यालय रांची में टेक्निकल सपोर्ट इंजीनियर के रूप में काम कर रहे थे, ने उसे टीडीपीएल के प्रोजेक्ट में 18,000 रुपए मासिक वेतन पर हेल्प डेस्क कार्य का प्रस्ताव दिया, जिसे उसने स्वीकार कर लिया। बता दें कि इससे पहले भी मीडिया में अभय तिवारी के स्वीकारोक्ति बयान के आधार पर टीडीपीएल को जेपीएससी में काम मिलने और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े कथित नेटवर्क की जानकारी सामने आ चुकी है।

परीक्षाओं में पैसे लेकर गड़बड़ी करता था उस्मान

मो. एबाद ने बताया कि सितंबर 2025 में वह टीडीपीएल कंपनी के जेपीएससी कार्यालय रांची पहुंचा और अभ्यर्थियों को फॉर्म भरने में सहायता देने का काम करने लगा। उसने बताया कि वह मो. उस्मान के निर्देश पर उनके कार्यों में सहयोग करता था और उस्मान प्रतियोगिता परीक्षाओं में पैसे लेकर गड़बड़ी करता था। वेतन का अधिकांश हिस्सा नकद दिया जाता था, जबकि कभी-कभी जरूरत पड़ने पर बैंक ऑफ बड़ौदा खाते में राशि भेजी जाती थी। एबाद ने यह भी बताया कि उसे कंपनी में कोई नियुक्ति पत्र नहीं दिया गया था।

किसकी क्या भूमिका

एबाद के अनुसार ओएमआर से जुड़ा काम प्रदीप संभालता था। ओएसएम प्रणाली को हेमंत वर्मा ने विकसित किया था और उसका संचालन भी करता था। ओएमआर तथा ओएसएम में टेंपरिंग एवं मैनिपुलेशन का काम हेमंत वर्मा और संजय मिलकर करते थे। संजय लगातार अभय तिवारी के संपर्क में रहता था और श्वेता के साथ समन्वय स्थापित कर अभ्यर्थियों के बीच लाइजनिंग का कार्य करता था। पूरी प्रक्रिया की निगरानी मो. उस्मान के पास थी।

अभय का नेटवर्क खंगाल रही सीआईडी

सीआईडी जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा में कथित गड़बड़ी के पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुटी है। सीआईडी यह पता लगाने में जुटी है कि परीक्षा में कथित अनियमितता की शुरुआत कहां से हुई, प्रश्नों के उत्तर किन लोगों तक पहुंचे, अभ्यर्थियों को कौन लेकर आया और इस पूरे नेटवर्क में पैसे का लेनदेन किन लोगों के बीच हुआ।

सीआईडी ने फिर से रिमांड पर लिए गए अभय तिवारी से रविवार को पूछताछ की। साइबार थाने में चल रही पूछताछ में सीआईडी उसके पहले के बयान और अबतक सामने आए तथ्यों को आमने-सामने रखकर कथित गड़बड़ी के नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। पूछताछ में नए नाम सामने आने की संभावना है। अभय के अलावा उसके भाई अक्षय तिवारी और पत्नी सुषमा कुमारी को भी रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा रही है। ज्ञात हो कि सीआईडी 18 संदिग्ध और संबंधित लोगों से पहले ही पूछताछ कर चुकी है।

अभय के भाई-पत्नी ने पास की थी परीक्षा

अभय के भाई अक्षय तिवारी और पत्नी सुषमा कुमारी ने भी जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा पास की थी। गिरफ्तारी के बाद सीआईडी अब तीनों से एक साथ और अलग-अलग पूछताछ कर तथ्यों का मिलान कर रही है। अभय के बयान के मुताबिक, टीडीपीएल के डी-इंपैनलमेंट के बाद वेबल एजेंसी सीजीएल परीक्षा का संचालन कर रही थी। इसी दौरान उसका संपर्क एजेंसी उमाकांत प्रमाणिक से हुई। उसके माध्यम से ही परीक्षा के प्रश्नों के उत्तर पहले ही मिल गए थे। उल्लेखनीय है कि सरकार ने सीजीएल परीक्षा को पहले ही रद्द कर दिया है, हालांकि झारखंड हाईकोर्ट की ओर से इसपर रोक लगाई जा चुकी है।

अलग-अलग पहलुओं की कड़ी जोड़ी जा रही

सीआईडी के सामने पूछताछ में मो एबाद के कथित बयान में श्वेता और अभय के कहने पर एजेंटों के जरिए कैंडिडेट लाए जाने की बात सामने आने का दावा किया गया है। इसका मतलब जांच अब दो अहम कड़ियों को जोड़ने में लगी है। इनमें परीक्षा से पहले प्रश्नों के उत्तर कथित तौर पर उपलब्ध कराने वाला नेटवर्क और उन अभ्यर्थियों तक पहुंचने वाला एजेंट नेटवर्क शामिल है। दोनों कड़ियों के बीच कौन-कौन लोग जुड़े थे, किस स्तर पर किसकी भूमिका थी और पैसे का लेनदेन कैसे हुआ, यह सीआईडी की पूछताछ के प्रमुख बिंदुओं में शामिल है।

Gaurav Kala

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