JMM- कांग्रेस के साथ BJP नेता भी मैदान में, झारखंड राज्यसभा चुनाव के लिए खरीदा पर्चा; रण में 2 निर्दलीय भी

लाइव हिन्दुस्तान, रांची
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झारखंड में होने वाले राज्यसभा चुनाव पर बड़ा अपडेट सामने आया है। 2 सीटों के लिए होने वाले चुनाव में अब तक 6 प्रत्याशियों ने नामांकन पत्र खरीदा है। इसमें जेएमएम, कांग्रेस के साथ एक बीजेपी नेता और 2 निर्दलीय प्रत्याशी भी शामिल हैं। इन प्रत्याशियों की वजह से राज्यसभा चुनाव दिलचस्प हो गया है।

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झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए होने वाला चुनाव अब सियासी शतरंज का मुकाबला बनता जा रहा है। जादुई नंबर 28 पाने के लिए शह-मात की चाल चली जा रही है। इसमें हर चाल के पीछे कई अर्थ तलाशे जा रहे हैं। शनिवार को झामुमो ने पूर्व मंत्री बैद्यनाथ राम को उम्मीदवार घोषित किया। कांग्रेस के पर्यवेक्षक बनकर रांची पहुंचे भूपेश बघेल ने सीएम हेमंत सोरेन से मुलाकात के बाद दावा किया कि कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा के समर्थन में गठबंधन एकजुट है। इसके बावजूद चुनावी तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं हुई है। उलटे छह नामांकन पत्र की खरीद ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।

BJP नेता ने भी खरीदा नामांकन पत्र

कुल छह नामांकन पत्र अभी तक बिक चुके हैं। शनिवार को पांच फॉर्म खरीदे गए। इनमें कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा, झामुमो प्रत्याशी बैद्यनाथ राम, भाजपा नेता गौरव वल्लभ, दो बार झारखंड से राज्यसभा सांसद रह चुके परिमल नथवानी, वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के पूर्व राज्यसभा सांसद वी. विजयसाई रेड्डी शामिल हैं। रवि कुमार यादव उर्फ रवि पीटर पहले ही फॉर्म खरीद चुके हैं।

नथवानी और रेड्डी को आखिर किसका भरोसा मिला

सबसे अधिक चर्चा परिमल नथवानी और आंध्र प्रदेश की राजनीति के चर्चित चेहरे रहे वी. विजयसाई रेड्डी की इंट्री को लेकर है। दोनों ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकन पत्र खरीदा है। इससे राजनीतिक गलियारों में यह सवाल गूंजने लगा है कि आखिर इन्हें किसका भरोसा मिला है? राज्यसभा चुनाव के लिए किसी भी निर्दलीय उम्मीदवार को नामांकन के साथ 10 प्रस्तावकों के हस्ताक्षर देने होते हैं। ऐसे में अब सबकी निगाहें आठ जून पर टिक गई हैं, जब नामांकन दाखिल होंगे और प्रस्तावकों के नाम सार्वजनिक होंगे। इन्हीं नामों से कई राजनीतिक रहस्यों पर से पर्दा उठ सकता है।

विजयसाई रेड्डी की इंट्री ने बढ़ाए सवाल

चर्चा का दूसरा बड़ा केंद्र हैं वी. विजयसाई रेड्डी। वह 2016 से 2025 तक राज्यसभा सांसद रहे हैं। वे संसदीय स्थायी समिति (परिवहन, पर्यटन एवं संस्कृति) के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। हाल ही में उन्होंने सक्रिय राजनीति से दूरी बनाने की घोषणा की थी। ऐसे में झारखंड से निर्दलीय नामांकन फार्म खरीदना राजनीतिक पर्यवेक्षकों को चौंका रहा है। सवाल यह है कि आंध्र प्रदेश के इस नेता को झारखंड की राजनीति में किसने आमंत्रित किया और किस आधार पर उन्हें समर्थन का भरोसा मिला? फिलहाल इसका जवाब किसी के पास नहीं है।

नथवानी के दांव से शिखर पर सियायी पारा

सबसे बड़ा सवाल परिमल नथवानी को लेकर खड़ा हो रहा है। इनका नाम कई महीनों से राजनीतिक चर्चा में था। यह माना जा रहा था कि वे तभी मैदान में उतरेंगे जब जीत के समीकरण को लेकर पूरी तरह आश्वस्त हो जाएंगे। राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि नथवानी को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के संकेत का इंतजार था। दूसरी तरफ यह चर्चा भी तेज है कि भाजपा 2014 की तरह इस बार भी नथवानी पर दांव खेल सकती है। भाजपा ने अभी तक अपना उम्मीदवार घोषित नहीं किया है, जबकि नामांकन की अंतिम तिथि सिर पर है। यद्यपि भाजपा नेता गौरव वल्लभ ने पर्चा खरीदा है। यही कारण है कि नथवानी की संभावित इंट्री को साधारण राजनीतिक घटना नहीं मानी जा रही।

Mohammad Azam

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मोहम्मद आजम पिछले 3.5 सालों से पत्रकारिता कर रहे हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान में स्टेट टीम में बतौर कंटेंट प्रोडूसर काम कर रहे हैं।


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आजम ने ग्रेजुएशन तक विज्ञान की पढ़ाई की है, लेकिन राजनीतिक विषयों में रुचि उनको पत्रकारिता की तरफ खींच लाई। आजम ने अपना पोस्ट ग्रेजुएशन देश के अग्रणी संस्थानों में से एक भारतीय जनसंचार संस्थान से पूरा किया। विज्ञान बैकग्राउंड होने के चलते आजम को फैक्ट आधारित पत्रकारिता करने में महारत हासिल है।


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