झारखंड में मेले का निरीक्षण कर रहे थे थाना प्रभारी, नशे में धुत युवकों ने घेरकर पीटा; सिर भी फोड़ दिया
झारखंड में मेले का निरीक्षण करने गए थाना प्रभारी को नशे में धुत युवकों ने जमकर पीटा। यहां तक कि उनका सिर भी फोड़ दिया। साथी पुलिसकर्मी उन्हें बचाकर अस्पताल ले गए, जहां उनके सिर में लगी चोटों का इलाज किया गया और टांके लगाए गए। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
झारखंड में मेले का निरीक्षण करने गए थाना प्रभारी को नशे में धुत युवकों ने जमकर पीटा। यहां तक कि उनका सिर भी फोड़ दिया। साथी पुलिसकर्मी उन्हें बचाकर अस्पताल ले गए, जहां उनके सिर में लगी चोटों का इलाज किया गया और टांके लगाए गए। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
झारखंड के खूंटी जिले के रानिया थाने के प्रभारी विकास कुमार जायसवाल पर रविवार को नशे में धुत कुछ युवकों ने हमला कर दिया। वह एक स्थानीय मेले में निरीक्षण करने गए थे। युवकों द्वारा हमला किए जाने से उनके सिर में चोटें आईं। अधिकारियों ने बताया कि यह
घटना लोहागढ़ा बाजार क्षेत्र में लगे मेले में दोपहर करीब 3 बजे हुई।
टोपरा के उपमंडल पुलिस अधिकारी क्रिस्टोफर केरकेट्टा ने बताया कि थाना प्रभारी जायसवाल जब मेले का निरीक्षण करने गए थे तब कुछ लोगों ने उन पर हमला किया और उनकी पिटाई की। वह अपनी टीम के साथ वहां पहुंचे थे।
केरकेट्टा ने बताया कि जब जायसवाल और उनकी टीम मेले में पहुंची तो उन्होंने देखा कि कुछ लोग हड़िया (स्थानीय चावल से बनी शराब) बेच रहे थे। इस दौरान कई युवक नशे में धुत होकर आपस में झगड़ा कर रहे थे। यह देखकर पुलिस टीम ने हड़िया की बिक्री रोकने और भीड़ को शांत करने के लिए हस्तक्षेप किया। इसी बीच नशे में धुत युवकों ने अचानक जायसवाल पर हमला कर दिया।
उन्होंने बताया कि मौके पर मौजूद कांस्टेबलों ने थाना प्रभारी को युवकों से बचाया और उन्हें अस्पताल ले गए। वहां उनके सिर में लगी चोटों का इलाज किया गया और टांके लगाए गए। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

लेखक के बारे में
Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।
शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।




