अब ऑनलाइन मुखबिर बन सकेंगे, झारखंड पुलिस ने गाइडलाइन जारी किया; क्या करना होगा

Subodh Kumar Mishra हिन्दुस्तान, जमशेदपुर
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झारखंड में अब आम नागरिक भी ऑनलाइन पुलिस के मुखबिर बन सकेंगे। अपराध पर नियंत्रण और सार्वजनिक सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है। इसके लिए क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम (सीसीटीएनएस) ने एक विशेष गाइडलाइन जारी की है।

अब ऑनलाइन मुखबिर बन सकेंगे, झारखंड पुलिस ने गाइडलाइन जारी किया; क्या करना होगा

झारखंड में अब आम नागरिक भी ऑनलाइन पुलिस के मुखबिर बन सकेंगे। अपराध पर नियंत्रण और सार्वजनिक सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है। इसके लिए क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम (सीसीटीएनएस) ने एक विशेष गाइडलाइन जारी की है। इसके तहत लोग घर बैठे ही संदिग्ध गतिविधियों, अपराध और सार्वजनिक स्थलों की सुरक्षा से जुड़ी जानकारी पुलिस तक पहुंचा सकेंगे।

राज्य पुलिस मुख्यालय ने इस नई व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए सभी जिलों को निर्देश जारी कर दिए हैं। अधिकारियों को स्पष्ट रूप से कहा गया कि वे इस प्रणाली के क्रियान्वयन को सुनिश्चित करें, ताकि अधिक से अधिक लोग जुड़ सकें और पुलिस को समय पर सूचनाएं मिल सके।

सार्वजनिक स्थलों की सुरक्षा पर भी नजर

इस प्लेटफॉर्म के जरिए लोग केवल अपराध ही नहीं, बल्कि भीड़ वाले इलाकों, बाजार, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड या अन्य सार्वजनिक स्थलों पर किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी भी दे सकेंगे। इससे सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाया जा सकेगा। राज्य पुलिस मुख्यालय ने जिलों के एसपी और अन्य अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे इस प्रणाली का व्यापक प्रचार करें।

झारखंड पुलिस के पोर्टल पर लॉगइन कर देना होगा इनपुट

इस व्यवस्था के तहत इच्छुक व्यक्ति को झारखंड पुलिस के पोर्टल पर लॉग इन करना होगा। लॉग इन करने के बाद उन्हें सूचना से संबंधित विकल्प मिलेगा, जहां वे अपनी जानकारी साझा कर सकते हैं। यह जानकारी गुप्त रूप से भी दी जा सकती है, जिससे मुखबिर की पहचान सुरक्षित रहे।

पुलिस अधिकारियों का मानना है कि इस पहल से अपराध पर नियंत्रण पाने में काफी मदद मिलेगी। कई बार छोटी-छोटी सूचनाएं भी बड़े अपराध को रोकने में अहम भूमिका निभाती हैं। आम नागरिकों की भागीदारी से पुलिस को जमीनी स्तर पर बेहतर इनपुट मिल सकेगा।

Subodh Kumar Mishra

लेखक के बारे में

Subodh Kumar Mishra

सुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।

ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।

शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।

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