झारखंड परीक्षा में गड़बड़ियों का मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, याचिका में क्या मांगें?
झारखंड में परीक्षाओं में गड़बड़ी का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। सामाजिक कार्यकर्ता हरिशरण देवगन की ओर से सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका में क्या की गई है मांग…

झारखंड में परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। एक सामाजिक कार्यकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर जेपीएससी की सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2025 को रद्द करके दोबारा कराने और मामलों की सीबीआई से जांच कराए जाने की मांग की है। परीक्षा और मूल्यांकन में गंभीर गड़बड़ियों के आरोपों के कारण राज्य में लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। याचिका में परीक्षा के आयोजन और मूल्यांकन में गंभीर गड़बड़ियों के आरोप हैं।
JPSC सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा रद्द करने की मांग
सामाजिक कार्यकर्ता हरिशरण देवगन ने वकील सत्यम सिंह राजपूत के जरिए दायर जनहित याचिका (PIL) में झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की सिविल सेवा परीक्षा में कथित गड़बड़ियों की CBI जांच या स्वतंत्र जांच की मांग की गई है। याचिका में JPSC की सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2025 को रद्द किए जाने को लेकर निर्देश देने की मांग भी की गई है।
स्वतंत्र समिति से कराई जा सकती है जांच
याचिका में कहा गया है कि छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो कथित तौर पर 3 अगस्त से भूख हड़ताल पर हैं। देवेंद्र नाथ महतो की अगवाई में प्रदर्शनकारी स्वतंत्र जांच और भर्ती प्रक्रिया में सुधार की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों की ओर से प्रकरण की CBI या एक स्वतंत्र समिति से जांच कराने की मांग की गई है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि प्रकरण की सुप्रीम कोर्ट के रिटायर न्यायाधीश या झारखंड के बाहर के किसी हाई कोर्ट के रिटायर मुख्य न्यायाधीश/न्यायाधीश की अगुवाई वाली स्वतंत्र समिति से भी कराई जा सकती है।
क्या आरोप?
यह याचिका 2 जुलाई, 2026 को प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम घोषित होने के बाद हुए विवाद के बीच दायर की गई है। याचिका के अनुसार, एक सफल उम्मीदवार की ओएमआर उत्तर पुस्तिका की कार्बन कॉपी बाद में वायरल हो गई, जिससे मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर आरोप लगने लगे। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि उम्मीदवार को योग्य घोषित किया गया, जबकि उसने कथित तौर पर पेपर-I में 100 में से केवल 48 सवालों के जवाब दिए थे।
परीक्षाओं में पारदर्शिता और संरचनात्मक बदलाव की मांग
याचिका में कहा गया है कि प्रस्तावित समिति में फोरेंसिक विज्ञान, सूचना प्रौद्योगिकी, परीक्षा सुरक्षा, OMR मूल्यांकन, साइबर सुरक्षा और लोक प्रशासन के विशेषज्ञ शामिल होंगे। याचिकाकर्ता ने OMR स्कैनिंग, कोडिंग, मूल्यांकन और परिणाम जारी करने के सिस्टम के स्वतंत्र ऑडिट की भी मांग की है। गौरतलब है कि जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में हालिया गड़बड़ियों के कारण झारखंड में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। प्रदर्शनकारी परीक्षाओं में पारदर्शिता और संरचनात्मक बदलाव की मांग कर रहे हैं।


