4 लोगों का परिवार, 2700 कैलोरी भोजन और 66 मीटर कपड़ा; झारखंड में न्यूनतम मजदूरी के नए नियम

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झारखंड में न्यूनतम मजदूरी के कुछ मापदंड तैयार किए हैं। इसमें चार लोगों का परिवार, प्रतिदिन 2700 कैलोरी भोजन और प्रति परिवार प्रति वर्ष 66 मीटर कपड़े का उपयोग करते हैं… शामिल है।

Jharkhand Labour Rules
झारखंड में न्यूनतम मजदूरी के नए नियम

नितेश ओझा, रांची

झारखंड में एक मानक श्रमिक परिवार, जिसमें कमाने वाला कामगार, उसकी पत्नी या पति और दो बच्चे शामिल हैं, को आधार मानकर न्यूनतम मजदूरी की गणना की जाएगी। जो परिवार प्रतिदिन प्रति उपभोग इकाई 2700 कैलोरी की खपत करते हैं और प्रति परिवार प्रति वर्ष 66 मीटर कपड़े का उपयोग करते हैं, उन्हें भी न्यूनतम मजदूरी तय करने का आधार माना जाएगा।

श्रम, नियोजन, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास विभाग ने मजदूरी संहिता (झारखंड) नियमावली- 2026 का प्रारूप जारी किया है। इसके अलावा विभाग द्वारा श्रमिकों से जुड़ी तीन अन्य नियमावलियों का भी प्रारूप जारी किया गया है। इनमें औद्योगिक संबंध (झारखंड) नियमावली- 2026, सामाजिक सुरक्षा (झारखंड) नियमावली-2026 तथा ऑक्युपेशनल सेफ्टी हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशन (झारखंड) रूल्स- 2025 है। चारों अधिसूचनाओं को लेकर आम लोगों से सुझाव भी मांगे गए हैं। यह सुझाव श्रम आयुक्त कार्यालय की अधिकृत ईमेल आईडी पर भेजे जा सकते हैं।

प्रतिदिन आठ घंटे कार्य व एक घंटे विश्राम

नियमावली में सामान्य कार्य दिवस में आठ घंटे कार्य और एक घंटे तक विश्राम अंतराल का प्रावधान है। किसी भी दिन कार्य 12 घंटे और सप्ताह में 48 घंटे से अधिक नहीं होगा। कृषि क्षेत्र में नियोजित कर्मचारियों के लिए यह समय-सीमा केंद्र द्वारा समय-समय पर निर्धारित होगी। हर कर्मचारी को सप्ताह में कम-से-कम एक दिन विश्राम मिलेगा, जो सामान्यतः रविवार होगा। हालांकि नियोक्ता अन्य दिन भी तय कर सकते हैं। कर्मचारी को लगातार 10 दिन से अधिक बिना अवकाश के काम नहीं करना होगा।

न्यूनतम मजदूरी दर तय करने को निर्धारित मापदंड

1. मानक श्रमिक वर्ग परिवार - जिसमें कमाने वाले कामगार के अलावा उसकी पत्नी या पति और दो बच्चे हैं, जो तीन वयस्क उपभोग इकाइयों के समान है।

2. कैलोरी खपत- रोज प्रति उपभोग इकाई के लिए 2700 कैलोरी की खपत।

3. वस्त्र-प्रति मानक श्रमिक वर्ग परिवार के लिए प्रति वर्ष 66 मीटर कपड़ा।

4. आवासीय किराया व्यय - जो भोजन और वस्त्र व्यय का 10 % होगा।

5. ईंधन, बिजली एवं अन्य मद - जो न्यूनतम मजदूरी का 20 % होंगी।

6. बच्चों की शिक्षा, चिकित्सा, मनोरंजन एवं अन्य आकस्मिक व्यय - न्यूनतम मजदूरी का 25 प्रतिशत।

दर तय करने को तकनीकी समिति गठित

न्यूनतम मजदूरी की दर निर्धारित करने और कौशल वर्गीकरण के संबंध में राज्य सरकार को परामर्श देने के लिए तकनीकी समिति बनेगी। इसमें श्रमायुक्त को अध्यक्ष तथा निदेशक, न्यूनतम मजदूरी को संयोजक बनाया गया है। सदस्य के तौर पर मुख्य कारखाना निरीक्षक तथा ग्रामीण विकास, जल संसाधन एवं लोक निर्माण विभाग के एक-एक नामित प्रतिनिधि होंगे। शिक्षा क्षेत्र और गैर सरकारी संगठनों से दो नामित प्रतिनिधि तथा आठ नियोजक और आठ श्रमिक प्रतिनिधियों को भी सदस्य बनाया गया है।

मजदूरी भुगतान, कटौती और वसूली का प्रावधान

यदि किसी कर्मचारी की मजदूरी से अधिकृत कुल कटौती 50 प्रतिशत से अधिक हो जाती है, तो शेष राशि आगामी महीनों में किस्तों में वसूली जाएगी। किसी भी माह की वसूली उस माह की मजदूरी के 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होगी। सामान की क्षति के लिए कटौती से पहले कर्मचारी को लिखित सूचना देने और स्पष्टीकरण का मौका देना होगा।

बोनस से जुड़े मामलों की भी गणना पद्धति तय

बोनस भुगतान से जुड़े मामलों की गणना पद्धति को भी नियमावली में स्पष्ट किया गया है। राज्य सलाहकार बोर्ड भी बनेगी। श्रम विभाग के सचिव अथवा प्रधान सचिव की अध्यक्षता वाले इस बोर्ड में 11 सदस्य होंगे। इनमें विधानसभा के दो सदस्य, श्रमायुक्त (बोर्ड के सदस्य सचिव) तथा निदेशक, न्यूनतम मजदूरी (सदस्य) हैं। ग्रामीण विकास, जल संसाधन, लोक निर्माण तथा नगर विकास में से प्रत्येक द्वारा एक-एक नामित प्रतिनिधि को बोर्ड में सदस्य बनाया जाएगा। औद्योगिक न्यायाधिकरण के पीठासीन पदाधिकारी रहे एक सदस्य, मजदूरी और श्रम से जुड़े अनुभव वाले दो सदस्य तथा शिक्षा एवं गैर सरकारी संगठनों के दो नामित प्रतिनिधि भी सदस्य के रूप में नामित किए जाएंगे।

Gaurav Kala

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गौरव काला: वरिष्ठ पत्रकार और स्टेट टीम सदस्य

संक्षिप्त विवरण: गौरव काला पिछले 15 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान में स्टेट टीम का हिस्सा हैं। वह विशेष रूप से हिमालयी राज्य उत्तराखंड के अलावा, दिल्ली-एनसीआर, मध्यप्रदेश, झारखंड समेत कई हिंदी बेल्ट के राज्यों की खबरें कवर कर रहे हैं।


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