रेलवे पुल के पिलर में दरार से सफर पर असर, झारखंड में मार्च तक नहीं चल पाएंगी ये ट्रेनें
पिलर क्षतिग्रस्त होने के कारण रांची- लोहरदगा-टोरी रेल मार्ग पर बाधित रेल गाड़ियों का परिचालन अब मार्च तक सामान्य नहीं हो सकेगा। राजधानी एक्सप्रेस, चोपन एक्सप्रेस, सासाराम एक्सप्रेस जैसी रेलगाड़ियों इस रूट से कम से कम तीन महीने नहीं चलेंगी।

झारखंड के रांची-लोहरदगा-टोरी रेलखंड पर स्थित कोयल नदी रेलवे पुल संख्या 115 में आई तकनीकी खामी के बाद इस रूट पर ट्रेनों का परिचालन फिलहाल पूरी तरह बंद कर दिया गया है। पुल के पिलर संख्या चार और पांच में दरार पाए जाने के बाद सुरक्षा कारणों से यह फैसला लिया गया। मंगलवार को दक्षिण पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक अनिल कुमार मिश्र ने तकनीकी विशेषज्ञों की टीम के साथ पुल का स्थलीय निरीक्षण किया।
पिलर क्षतिग्रस्त होने के कारण रांची- लोहरदगा-टोरी रेल मार्ग पर बाधित रेल गाड़ियों का परिचालन अब मार्च तक सामान्य नहीं हो सकेगा। राजधानी एक्सप्रेस, चोपन एक्सप्रेस, सासाराम एक्सप्रेस जैसी रेलगाड़ियों इस रूट से कम से कम तीन महीने नहीं चलेंगी। लोहरदगा रांची टोरी मेमू ट्रेन भी रांची से नागजुआ तक आएगी। टोरी से लोहरदगा तक के लिए अलग ट्रेन चलेगी।
लोहरदगा से नागजुआ के सात किलोमीटर की दूरी, जिसके बीच में क्षतिग्रस्त पुल है, उसे कवर करने और यात्रियों की सुविधा के लिए रेलवे बस सेवा मुहैया कराएगी। पुल के आसपास से बड़े पैमाने पर बालू का अवैध उठाव होता रहा है। महाप्रबंधक ने बताया कि इसकी वजह से ही पुल का फाउंडेशन क्षतिग्रस्त हुआ है। दक्षिण पूर्व रेलवे के जीएम अनिल कुमार मिश्रा ने लोहरदगा कोयल नदी पुल के क्षतिग्रस्त पीलरों और इनकी मरम्मत के कार्य का मुआयना किया।
जीएम ने कहा कि 115 नंबर पुल का पांच नंबर पीलर टिल्ट हो गया था। इसे 24 घंटे निगरानी में रखते हुए मरम्मत का कार्य किया जा रहा था। मगर इसी दौरान अन्य पिलर में भी ऐसी ही समस्या देखी गई। इसलिए एहतियातन रेल गाड़ियों का परिचालन रोक गया है।
फिलहाल क्षतिग्रस्त पिलरों की मरम्मत का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है। मगर मार्च के पहले तक इसे पूरी तरह दुरुस्त कर पाना संभव नहीं है। इसके बाद ही रेल गाड़ियों का परिचालन पहले की तरह सामान्य हो सकेगा। वैसे यह काम मई तक चल सकता है। ताकि मॉनसून के पहले पुल की सुरक्षा का पुख्ता बंदोबस्त हो सके। जीएम ने कहा कि पुल के आसपास से बालू के उठाव की वजह से पुल के पीलर एक्सपोज हो गए। इस वजह से नदी के बहाव ने फाउंडेशन को नुकसान पहुंचाया है। अब क्षतिग्रस्त पीलरों के साथ-साथ अन्य पीलरों के फाउंडेशन को भी मजबूत करने का काम होगा। ताकि ऐसी स्थिति दोबारा न हो। रेलवे महाप्रबंधक के साथ रेलवे के कई प्रशासनिक और तकनीकी अधिकारी पहुंचे थे।


