अभिजीत दीपके 3 दिन की भूख से हारे, पर देवेंद्र नाथ महतो ने 9 दिन अनशन के बाद भी वह कर दिखाया
झारखंड की राजधानी रांची में सोमवार को हुए विधानसभा मार्च में देवेंद्र नाथ महतो ने भी हिस्सा लिया। वह 9 दिन से अनशन पर होने के बावजूद एंबुलेंस में बैठकर मार्च में निकले।

दिल्ली के बाद झारखंड की राजधानी रांची में छात्रों का आंदोलन तेज हो गया है। सोमवार को हजारों छात्रों ने पुरानी से नई विधानसभा की ओर मार्च किया। खास बात यह है कि 9 दिन से अनशन कर रहे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने भी विधानसभा घेराव में हिस्सा लिया। महतो का मार्च में निकलना कितनी हिम्मत का काम है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन के दौरान 'संसद मार्च' में शामिल नहीं हो पाए अभिजीत दीपके ने कहा कि 3 दिन तक भूख हड़ताल की वजह से वह खुद प्रदर्शनकारियों की अगुआई नहीं कर पाए थे।
जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षा में गड़बड़ी के विरोध में हजारों छात्र विधानसभा मार्च के लिए निकले। पुराने विधानसभा के पास से आगे बढ़े छात्रों ने पुलिस की ओर से लगाई गई कई बैरिकेडिंग को एक के बाद एक पार किया। इसके बाद छात्र शहीद मैदान के पास सड़क पर बैठ गए। छात्रों को आगे बढ़ने से रोकने के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी। हालांकि, छात्र संगठनों के वोलेंटियर लगातार भीड़ को नियंत्रित करने और छात्रों को आगे बढ़ने से रोकने का प्रयास करते रहे।
एंबुलेंस, स्ट्रेचर से देवेंद्र नाथ महतो का मार्च
शुरुआत में चार दिन तक पानी भी ग्रहण नहीं करने वाले देवेंद्र नाथ महतो ने विधानसभा मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों को अकेला नहीं छोड़ा। 9 दिन से अनशन कर रहे देवेंद्र नाथ महतो हाथ में शिबू सोरेन की तस्वीर लेकर मार्च के लिए निकल पड़े। मंच से कुछ कदम पैदल चलने के बाद महतो को एंबुलेंस में बिठाया गया। कुछ दूरी तक एंबुलेंस से तय करने के बाद कुछ आंदोलनकारियों ने स्ट्रेचर को कंधे पर उठा लिया और देवेंद्र नाथ महतो को लेकर आगे बढ़ निकले। देवेंद्र नाथ की इस हिम्मत को देखकर छात्रों का जोश बढ़ गया और उनके समर्थन में जमकर नारेबाजी की गई।
अनशन से ज्यादा दर्द कांटेदार जाल से
आंदोलनकारी देवेंद्र नाथ महतो ने मार्च के दौरान मीडिया से बात करते हुए कहा कि उन्हें अनशन से अधिक दुख पुलिस की ओर से लगाए गए कंटीले तारों को देखकर हुआ है। उन्होंने कहा, 'सरकार ने अराजकता को न्योता दिया। मैं हॉस्पिटल में होने की स्थिति में हूं। मैं 9 दिन से भूख हड़ताल पर हूं। मैं एक साधारण लड़का हूं, माड़-भात और सूखी रोटी खाता हूं। मेरी निजी जिंदगी में कुछ बदलाव नहीं होने वाला है। मुझे भूख हड़ताल से अधिक कष्ट कांटेदार जाल से हुआ है। तीन लेयर की बैरिकेड टूट गए हैं। सरकार क्यों अराजकता चाहती है? सरकार छात्रों की मांग पर क्यों सहमत नहीं है? मैं सभी छात्रों और मीडिया को धन्यवाद देता हूं जो पीड़ित छात्रों की आवाज बुलंद कर रहे हैं। संयम बनाकर रखें, अनुशासन बनाकर रखें। आज हेमंत सोरेन का जन्मदिन है, मैं नहीं चाहता था कि वह ऐसा कुछ करें कि जंतर मंतर की तरह अनहोनी हो। छात्रों को चोट पहुंचे और आंदोलन उग्र हो जाए। जन्मदिन पर वह ऐसा तोहफा ना दें जिससे खून बहे।'
देवेंद्र नाथ महतो ने कहा कि वह अपनी जान को जोखिम में डालकर मार्च में शामिल हुए हैं, क्योंकि कभी भी आंदोलन उग्र हो सकता है, भगदड़ मच सकती है, आंसू गैस के गोले दागे जा सकते हैं और वह इस स्थिति में भाग नहीं पाएंगे। उन्होंने कहा कि यदि शिबू सोरेन जिंदा होते तो आंदोलनकारी छात्रों के साथ होते, जिन्होंने खुद जिंदगीभर आंदोलन किए।
संसद मार्च में नहीं जाने पर क्या बोले थे दीपके
कॉकरोच जनता पार्टी के दिल्ली में हुए आंदोलन के दौरान 20 मार्च को जब संसद मार्च का आयोजन किया गया तो खुद सीजेपी के मुखिया अभिजीत दीपके इसमें अगुआई नहीं कर पाए थे। वह जंतर-मंतर पर ही एक ट्रक पर रहे। इस बात को लेकर उनकी खूब आलोचना की गई। दीपके ने हाल ही में एक इंटरव्यू में इस पर कहा कि वह तीन दिन से अनशन पर थे, उन्हें चक्कर आ गया था। सीजेपी के अन्य साथियों के कहने पर वह ट्रक पर सवार होकर भीड़ को गाइड करना चाहते थे। दीपके ने कहा कि यदि वह अनशन पर नहीं होते तो जमीन पर खुद भी उतरकर मार्च करते।


