Explainer: झारखंड में छात्र प्रदर्शन क्यों कर रहे हैं, JPSC-JSSC भर्ती परीक्षा में क्या हैं गड़बड़ियां? जानिए 5 बड़ी मांगें
Jharkhand JPSC-JSSC Student Protest: झारखंड में JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के विरोध में छात्र 25 जुलाई से आंदोलन कर रहे हैं। विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने JPSC परीक्षा पास कराने के लिए 40 लाख रुपये तक रिश्वत लेने का आरोप लगाया है। जानिए आखिर क्या हैं आरोप और छात्रों की मांगें।

Jharkhand JPSC-JSSC Student Protest: झारखंड में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हजारों अभ्यर्थी इन दिनों सड़कों पर धूल-पानी की मार झेल रहे हैं। रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में 25 जुलाई से शुरू हुए आंदोलन की गूंज अब दिल्ली तक सुनाई दे रही है। इन सबके केंद्र में है- भर्ती परीक्षा में लग रहे घोटालों के आरोप। झारखंड विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी का आरोप है कि JPSC पास करने के लिए 40 लाख रुपये की रिश्वत ली जा रही है।
छात्रों द्वारा इस आंदोलन की शुरुआत 14वीं झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) सिविल सेवा परीक्षा में कथित अनियमितताओं के आरोपों से हुई थी, लेकिन अब आंदोलन का दायरा JSSC समेत दूसरी भर्ती परीक्षाओं तक फैल गया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी बातचीत की पेशकश की है। ऐसे में आइए समझते हैं कि JPSC-JSSC आंदोलन का पूरा विवाद आखिर क्या है।
आंदोलन की शुरुआत कैसे हुई?
14वीं जेपीएससी संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 19 अप्रैल 2025 को आयोजित हुई थी। परीक्षा के बाद कई अभ्यर्थियों ने प्रश्नपत्र, ओएमआर शीट और परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी होने के आरोप लगाए थे। मामला बढ़ने पर सरकार ने CID जांच शुरू कराई। जांच के दौरान कई गिरफ्तारियां भी हुईं। इसी दौरान JPSC के तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांग्ते ने इस्तीफा दे दिया। इसके बाद मामला और बढ़ा तो सरकार ने मुख्य परीक्षा स्थगित कर दी। इन तीन घटनाओं के बाद परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्र सड़कों पर उतर आए और इस तरह 25 जुलाई से रांची में अनिश्चितकालीन धरना शुरू हो गया।
JPSC और JSSC को लेकर क्या आरोप हैं?
प्रदर्शन कर रहे छात्रों का आरोप है कि राज्य की भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता पर सालों से सवाल उठते आ रहे हैं। उनका कहना है कि केवल 14वीं JPSC परीक्षा ही नहीं, बल्कि JSSC की कुछ भर्तियों में भी कथित पेपर लीक, परीक्षा संचालन और चयन प्रक्रिया को लेकर विवाद सामने आए हैं।
अभ्यर्थियों का दावा है कि इन मामलों में पहले भी जांच हुई, लेकिन दोषियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसी वजह से वे राज्य की जांच एजेंसी के बजाय स्वतंत्र जांच की मांग कर रहे हैं। हालांकि, सरकार की ओर से इन आरोपों को लेकर जांच जारी है और अंतिम निष्कर्ष अभी सामने नहीं आया है।
आंदोलन कर रहे छात्रों की प्रमुख पांच मांगें क्या हैं?
- 14वीं JPSC संयुक्त प्रारंभिक परीक्षा रद्द की जाए।
- पूरे मामले की जांच CBI या झारखंड से बाहर के हाईकोर्ट के रिटायर्ड जजों की स्वतंत्र समिति से कराई जाए।
- JPSC और JSSC में बड़े स्तर पर संस्थागत सुधार किए जाएं।
- भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और जवाबदेह बनाया जाए।
- कथित गड़बड़ियों में शामिल सभी लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
JPSC परीक्षा पास करने का रेट 40 लाख रुपये
छात्र आंदोलन के बीच झारखंड विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी लगातार हेमंत सोरेन सरकार पर हमलावर हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि झारखंड में JPSC के जरिए सरकारी अधिकारी बनने के लिए अभ्यर्थियों से करोड़ों नहीं, बल्कि चरणबद्ध तरीके से लाखों रुपये की रिश्वत ली जाती है। मरांडी का दावा है कि प्रारंभिक परीक्षा (PT) पास कराने के लिए 5 लाख रुपये, मुख्य परीक्षा (Mains) के लिए 25 लाख रुपये और इंटरव्यू में सफलता दिलाने के लिए 10 लाख रुपये तक मांगे जाते हैं। यानी एक अभ्यर्थी से कुल 40 लाख रुपये वसूले जाने का कथित "रेट चार्ट" बनाया गया है।
आंदोलन कितना बड़ा हो चुका है?
25 जुलाई से शुरू हुआ धरना अब हजारों अभ्यर्थियों का आंदोलन बन चुका है। कई छात्र पिछले दिनों आमरण अनशन पर भी बैठ गए। अन्न-जल त्यागकर अनशन पर बैठे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो की चौथे दिन तबीयत बिगड़ने लगी तो हाल ही में नीट पेपर लीक के खिलाफ लंबा अनशन कर चुके सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने उनसे फोन पर बात की। वांगचुक ने महतो से कम से कम पानी पीने की अपील की, जिसके बाद उन्होंने पानी तो पी लिया, लेकिन अनशन जारी रखने का फैसला किया।
इसी बीच जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म्स मंच के बैनर तले दो महिलाओं समेत पांच अन्य अभ्यर्थी भी आमरण अनशन में शामिल हो गए। इसके बाद अनशन पर बैठे प्रदर्शनकारियों की संख्या बढ़कर छह हो गई। आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होता, तब तक उनका आंदोलन और अनशन जारी रहेगा।
सरकार ने अब तक क्या कार्रवाई की है?
मामले की जांच झारखंड CID कर रही है। जांच एजेंसी अब तक कई लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। विभिन्न जिलों में छापेमारी भी हुई है और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, दस्तावेजों तथा अन्य साक्ष्यों को जब्त किया गया है।
सीआईडी ने जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते से भी कई दौर की पूछताछ की है। दूसरी ओर, बढ़ते विवाद के बीच जेपीएससी ने संयुक्त सिविल सेवा मुख्य परीक्षा स्थगित कर दी थी।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने क्या कहा?
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा है कि कथित पेपर लीक केवल झारखंड का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर का मुद्दा बन चुका है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार इस मामले को गंभीरता से देख रही है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सरकार के दरवाजे छात्रों के लिए खुले हैं और उनकी हर मांग तथा सुझाव को गंभीरता से सुना जाएगा।


