बार-बार लो वोल्टेज से परेशान हैं? झारखंड की हर विधानसभा में बनेंगे 5 नए पावर सबस्टेशन, जानें 3 बड़े फायदे

हिन्दुस्तान, रांची
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झारखंड में लो वोल्टेज और बिजली आपूर्ति की समस्या दूर करने के लिए जेबीवीएनएल ने हर विधानसभा क्षेत्र में कम से कम पांच नए पावर सबस्टेशन बनाने का फैसला लिया है। ग्रामीण इलाकों में 15-20 किमी के दायरे में 33/11 केवी सबस्टेशन बनाने पर भी जोर है। जानिए इससे तीन बड़े फायदे क्या होंगे।

बार-बार लो वोल्टेज से परेशान हैं? झारखंड की हर विधानसभा में बनेंगे 5 नए पावर सबस्टेशन, जानें 3 बड़े फायदे
झारखंड में हर विधानसभा में बनेंगे 5 नए पावर सबस्टेशन, जानें 3 बड़े फायदे

झारखंड में बार-बार लो वोल्टेज और बिजली की कमजोर आपूर्ति से परेशान उपभोक्ताओं को आने वाले समय में राहत मिल सकती है। झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (जेबीवीएनएल) ने राज्य के हर विधानसभा क्षेत्र में कम से कम पांच नए विद्युत शक्ति उपकेंद्र (पावर सबस्टेशन) बनाने का फैसला लिया है। इसके लिए सभी जिलों में जमीन चिह्नित कर उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया गया है।

ऊर्जा विकास निगम के सीएमडी के. श्रीनिवासन ने कहा है कि उपभोक्ताओं तक उचित वोल्टेज के साथ बिजली पहुंचाने के लिए वितरण नेटवर्क को मजबूत करना जरूरी है। इसी उद्देश्य से नए सबस्टेशन और छोटी दूरी के फीडर विकसित किए जाएंगे। इससे बिजली को उपभोक्ताओं तक पहुंचाने की दूरी कम होगी और नेटवर्क पर दबाव भी घटेगा।

जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू

जेबीवीएनएल के निदेशक (वितरण एवं परियोजना) प्रभात कुमार श्रीवास्तव ने शुक्रवार को सभी विद्युत आपूर्ति क्षेत्रों के महाप्रबंधक सह मुख्य अभियंताओं को पत्र भेजा है। इसमें संबंधित जिलों के उपायुक्तों से नए सबस्टेशन के लिए जमीन उपलब्ध कराने का अनुरोध करने को कहा गया है। अधिकारियों को जमीन चिह्नित करने के साथ इसकी अनुपालन रिपोर्ट मुख्यालय को भेजने का भी निर्देश दिया गया है।

ग्रामीण इलाकों में 15-20 किमी के दायरे पर जोर

जेबीवीएनएल की यह योजना सिर्फ शहरों तक सीमित नहीं रहेगी। निगम के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में भी 15 से 20 किलोमीटर के दायरे में 33/11 केवी के नए सबस्टेशन की जरूरत है। इससे गांवों में बिजली आपूर्ति के लिए बहुत लंबी दूरी के फीडरों पर निर्भरता कम की जा सकेगी।

जानें 3 बड़े फायदे

1. लो वोल्टेज की समस्या में कमी

सबस्टेशन उपभोक्ताओं के ज्यादा करीब होने से बिजली को लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी। इससे खासकर ग्रामीण इलाकों में लो वोल्टेज की समस्या कम करने में मदद मिल सकती है।

2. बिजली की गुणवत्ता बेहतर होगी

छोटी दूरी के फीडर और मजबूत वितरण नेटवर्क से उपभोक्ताओं तक अपेक्षाकृत बेहतर वोल्टेज में बिजली पहुंचाने में मदद मिलेगी। इससे बिजली की गुणवत्ता में सुधार होगा।

3. सप्लाई ज्यादा भरोसेमंद होगी

नए सबस्टेशन बनने से मौजूदा बिजली नेटवर्क पर दबाव कम किया जा सकेगा। किसी इलाके में तकनीकी समस्या आने पर बिजली आपूर्ति को दूसरे स्रोत से व्यवस्थित करने की गुंजाइश भी बढ़ेगी।

जेबीवीएनएल का यह कदम राज्य में बढ़ती बिजली जरूरत के साथ वितरण व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है। हालांकि नए सबस्टेशन कब तक बनकर तैयार होंगे, यह जमीन उपलब्ध होने और आगे की परियोजना प्रक्रिया पूरी होने के बाद स्पष्ट होगा।

Ratan Gupta

लेखक के बारे में

Ratan Gupta

रतन गुप्ता एक डिजिटल हिंदी जर्नलिस्ट/ कॉन्टेंट प्रोड्यूसर हैं। वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान की स्टेट न्यूज टीम के साथ काम कर रहे हैं। वह क्राइम, राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर न्यूज आर्टिकल और एक्सप्लेनर स्टोरीज लिखते हैं।


रतन गुप्ता वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर स्टेट न्यूज टीम में काम करते हैं। इस टीम में हिंदी पट्टी के 8 राज्यों दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, गुजरात से जुड़ी खबरों की कवरेज करते हैं। उनका लेखन खास तौर से क्राइम, राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर केंद्रित रहता है।


लाइव हिंदुस्तान में बीते 2 साल से काम करते हुए रतन ने ब्रेकिंग न्यूज, राजनीतिक घटनाक्रम और कानून-व्यवस्था से जुड़ी खबरों पर लगातार लेखन किया है। इसके साथ ही वह एक्सप्लेनर स्टोरीज लिखने में भी विशेष रुचि रखते हैं, जहां जटिल मुद्दों को सरल और तथ्यपरक भाषा में पाठकों के सामने रखते हैं।


रतन गुप्ता ने बायोलॉजी में ग्रेजुएशन किया है, जिसके बाद उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता की पढ़ाई की है। साइंस बैकग्राउंड होने के कारण उनकी न्यूज और एनालिसिस स्टोरी में साइंटिफिक टेंपरामेंट, लॉजिकल अप्रोच और फैक्ट-बेस्ड सोच साफ दिखाई देती है। वह किसी भी मुद्दे पर रिपोर्टिंग करते समय दोनों पक्षों की बात, मौजूद तथ्यों और आधिकारिक स्रोतों को प्राथमिकता देते हैं, ताकि यूजर तक संतुलित और भरोसेमंद जानकारी पहुंचे।


इसके साथ ही आईआईएमसी की एकेडमिक पढ़ाई ने उन्हें रिपोर्टिंग, न्यूज प्रोडक्शन, मीडिया एथिक्स और पब्लिक अफेयर्स की गहरी समझ दी है। इसका सीधा असर उनके लेखन की विश्वसनीयता और संतुलन में दिखाई देता है।

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