सड़कों की मरम्मत कब होगी? रांची के खस्ताहाल रास्तों पर हाई कोर्ट सख्त; मांग लिया जवाब
रांची शहर की सड़कों, पुल-पुलियों और नागरिक सुविधाओं की बदहाल स्थिति को लेकर झारखंड हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने राज्य सरकार से रांची के कई इलाकों में सड़क निर्माण और मरम्मत कार्यों की प्रगति पर विस्तृत जवाब मांगा है।

रांची शहर की सड़कों, पुल-पुलियों और नागरिक सुविधाओं की बदहाल स्थिति को लेकर झारखंड हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने राज्य सरकार से राजधानी के कई इलाकों में सड़क निर्माण और मरम्मत कार्यों की प्रगति पर विस्तृत जवाब मांगा है। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली खंडपीठ में हुई।
मामले में सरकार को निर्देश दिया कि वह बताये कि शहर की जर्जर सड़कों की मरम्मत कब तक पूरी की जाएगी। मामले की अगली सुनवाई 26 फरवरी को निर्धारित की गई है, जिसमें नगर विकास विभाग और पथ निर्माण विभाग को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।
अदालत को जानकारी दी गई कि रांची के कई प्रमुख इलाकों जैसे बरियातू, रातू रोड, बिरसा चौक, हरमू रोड, किशोरगंज, मोरहाबादी, कांके रोड, डोरंडा, पुंदाग, रातू, अरगोड़ा, बूटी मोड़, कांटाटोली, खेलगांव सहित अन्य क्षेत्रों में लगभग 50 हजार लोग बिना सुगम सड़क और बुनियादी सुविधाओं के रहने को मजबूर हैं। खराब सड़कों के कारण रोजाना जाम, दुर्घटनाएं और जलजमाव जैसी समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट को बताया गया कि कई मुख्य मार्गों की स्थिति इतनी खराब है कि हल्की बारिश में भी वाहन फंस जाते हैं। इस पर अदालत ने सरकार से पूछा कि अब तक सड़कों के सुधार के लिए क्या ठोस कदम उठाए गए हैं। कोर्ट ने राज्य सरकार को एक सप्ताह के भीतर विस्तृत शपथ पत्र दायर करने का निर्देश दिया है।
झारखंड हाईकोर्ट में मेसर्स अमलगम स्टील्स एंड पावर लिमिटेड और मेसर्स अमलगम स्टील्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा बिजली उत्पादन और बिक्री में इलेक्ट्रिसिटी एक्ट के नियमों का उल्लंघन कर राज्य सरकार को लगभग 500 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाने के आरोपों से जुड़ी जनहित याचिका पर गुरुवार को सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए जेबीवीएनएल, दोनों कंपनियों और याचिकाकर्ता की संयुक्त बैठक कर वास्तविक राजस्व घाटे का आकलन करने का निर्देश दिया है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 16 जून को निर्धारित की है।
एनर्जी वॉच डॉग नामक संस्था द्वारा दायर इस याचिका में आरोप लगाया गया है कि दोनों कंपनियां नियमों की अनदेखी कर आपस में बिजली का लेन-देन कर रही हैं, जिससे राज्य सरकार को भारी वित्तीय क्षति हुई है। जेबीवीएनएल ने शपथ पत्र के माध्यम से अदालत को बताया कि कंपनी को शोकॉज नोटिस जारी किया गया है और अब तक की जांच में लगभग 284 करोड़ रुपये के राजस्व नुकसान की बात सामने आई है। अदालत ने कहा कि यदि राज्य को राजस्व का घाटा हुआ है तो यह निश्चित रूप से जनहित का विषय है, इसलिए याचिका सुनवाई योग्य है।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता विपुल पोद्दार ने तर्क दिया कि दोनों कंपनियां सिस्टर कंसर्न हैं और नियमों का उल्लंघन कर अवैध तरीके से बिजली की बिक्री कर रही हैं, जिससे राज्य को करीब 500 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
नक्शा पास करने के अधिकार पर कोर्ट का हस्तक्षेप
रांची। झारखंड हाईकोर्ट ने जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति (जेएनएसी) द्वारा भवन निर्माण का नक्शा पास किए जाने के अधिकार पर सवाल उठाते हुए मामले में महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश पारित किया है। कोर्ट ने जेएनएसी द्वारा पास किए गए एक भवन नक्शे पर फिलहाल रोक लगा दी है। कहा है कि जब तक यह स्पष्ट नहीं हो जाता कि नगर निकाय पुनर्गठन के बाद जेएनएसी को नक्शा पास करने का वैधानिक अधिकार है या नहीं, तब तक संबंधित मामले में कोई आगे की कार्रवाई नहीं की जाएगी। सुंदर लाल कोठारी और अन्य द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस राजेश कुमार की पीठ ने नगर विकास विभाग को भी इस मामले में प्रतिवादी बनाने का आदेश दिया है। साथ ही बिल्डर और टेक्निकल प्रबंधक को भी नोटिस जारी किया गया है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि बिल्डर और जेएनएसी अधिकारियों की मिलीभगत से उनकी रैयती जमीन पर अवैध रूप से नक्शा पास कर दिया गया। जबकि, उन्होंने इसके लिए कोई आवेदन ही नहीं दिया था। उनका कहना है कि बिल्डर को नक्शा पास होने की सूचना नहीं दी गई और बिना उचित प्रक्रिया अपनाए उनकी जमीन पर निर्माण कार्य शुरू करा दिया गया है।
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