पहाड़िया समुदाय की सुरक्षा के आदेश, झारखंड HC से मुस्लिम आरोपियों की अर्जी खारिज

भाषा, रांची
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झारखंड हाईकोर्ट ने साहिबगंज में पहाड़िया समुदाय के उत्पीड़न पर सख्त रुख अपनाते हुए प्रशासन को फटकार लगाते हुए पीड़ितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। अदालत ने मुस्लिम आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी है।

पहाड़िया समुदाय की सुरक्षा के आदेश, झारखंड HC से मुस्लिम आरोपियों की अर्जी खारिज

झारखंड हाईकोर्ट ने साहिबगंज जिले के कस्बा गांव में पहाड़िया समुदाय के उत्पीड़न पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने साहिबगंज प्रशासन को जिले में पहाड़िया समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। आरोप है कि कस्बा गांव में पहाड़िया समुदाय के लोगों को होली मनाने पर मुस्लिम समुदाय के आरोपियों ने घेर लिया था। आरोपियों ने होली मनाने को लेकर पहाड़िया समुदाय के सदस्यों को धमकाया और हुक्का पानी तक बंद करा दिया।

होली मनाने से रोका

न्यायमूर्ति संजय प्रसाद की अदालत ने कुछ आरोपियों की अपील की सुनवाई की। इस दौरान अदालत को बताया गया कि साहिबगंज के कस्बा गांव में पहाड़िया समुदाय के लोगों को होली मनाने से मुस्लिम समुदाय के आरोपियों ने रोक दिया था। जश्न मनाने वालों को शफीक उल शेख, जलील शेख और अल्पसंख्यक समुदाय के अन्य आरोपियों ने घेर लिया। पीड़ित पक्ष की ओर से बताया गया कि विवाद के कारण पहाड़िया समुदाय के लोगों को भूखा रखा गया।

धमकी दी, सरकारी जलापूर्ति भी रोकी, हुक्का-पानी बंद

अदालत को बताया गया कि घटना पिछले साल 14 मार्च की है। पहाड़िया समुदाय के सदस्य होली मना रहे थे। पहाड़िया समुदाय के लोग गांव में लाउडस्पीकर पर बज रहे संगीत पर नाच रहे थे। इसी दौरान आरोपियों ने पहाड़िया समुदाय के लोगों को घेर कर धमकाया। आलम यह कि पहाड़िया समुदाय को सरकारी जल आपूर्ति का इस्तेमाल करने से भी रोक दिया गया। आरोपियों की ओर से पहाड़िया समुदाय के लोगों का हुक्का-पानी तक बंद करा दिया गया।

पूरे गांव में जारी किया फरमान, बच्चों को स्कूल से रोका

पीड़ित ने अदालत को बताया कि गांव में फरमान जारी कर दिया गया कि पहाड़िया समुदाय के लोगों को किसी भी प्रकार का राशन या दवा नहीं बेची जाएगी। आरोपियों की ओर से गुट बनाकर पहाड़िया समुदाय के बच्चों को सरकारी स्कूल और गांव के आंगनवाड़ी केंद्र की सेवाओं से भी वंचित कर दिया गया। लगातार उत्पीड़न के कारण पहाड़िया समुदाय भुखमरी के कगार पर आ गया था। बता दें कि पहाड़िया समुदाय विशेष संवेदनशील जनजातीय समूह (पीवीटीजी) है।

मदद करने पर 10 हजार तक के जुर्माने का लगाया फरमान

आरोपियों की ओर से गांव में तालिबानी फरमान जारी करा दिया गया कि पहाड़िया समुदाय की मदद करने वाले किसी भी व्यक्ति को 10,000 रुपये तक का जुर्माना देना होगा। इलाके में मदद की सारी उम्मीदें खो जाने के बाद पहाड़िया समुदाय के एक पीड़ित ने प्राथमिकी दर्ज कराई। बरहरवा पुलिस स्टेशन में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया गया।

आरोपियों की जमानत याचिका खारिज, प्रशासन को भी सुना दिया

इस मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने 28 जनवरी को आदेश पारित करते हुए आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि जिला प्रशासन की ओर से भी पहाड़िया समुदाय के लोगों की घोर उपेक्षा की गई है। अदालत ने पुलिस की धीमी जांच पर भी सवाल उठाया। साहिबगंज के उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिया कि वे पहाड़िया समुदाय के लोगों को उचित सुरक्षा प्रदान करें।

दिया आदेश, सुरक्षा के साथ कल्याण भी सुनिश्चित करें

झारखंड हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान साहिबगंज के उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिया कि पहाड़िया समुदाय के लोगों का कल्याण सुनिश्चित किया जाना चाहिए। अदालत ने पुलिस महानिदेशक, मुख्य सचिव और अन्य सरकारी अधिकारियों को भी नोटिस जारी करते हुए साहेबगंज जिले में पहाड़िया समुदाय के जीवन की सुरक्षा के लिए उचित और पर्याप्त कदम उठाए जाने का आदेश दिया है।

Krishna Bihari Singh

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कृष्ण बिहारी सिंह वरिष्ठ पत्रकार और स्टेट टीम का हिस्सा (दिल्ली-NCR, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, राजस्थान और गुजरात )


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