क्या दाखिल-खारिज में गड़बड़ी होने पर जमीन का कब्जा नहीं मिलेगा? झारखंड HC ने साफ किया नियम
झारखंड हाईकोर्ट ने कहा है कि दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) में गड़बड़ी होने मात्र से जमीन का कब्जा नहीं रोका जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि म्यूटेशन स्वामित्व का प्रमाण नहीं है और वैध बिक्री प्रमाणपत्र के आधार पर खरीदार कब्जे का हकदार है।

अगर आपने बैंक की नीलामी में जमीन खरीदी है और दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) में किसी तरह की गड़बड़ी सामने आती है, तो क्या आपको जमीन का कब्जा नहीं मिलेगा? इस सवाल पर झारखंड हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि केवल म्यूटेशन में विसंगति होने के आधार पर खरीदार को जमीन का कब्जा देने से इनकार नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि म्यूटेशन जमीन के स्वामित्व का प्रमाण नहीं होता।
जानिए कहां से शुरू हुआ मामला
मामला पूर्वी सिंहभूम निवासी अंजनी कुमार सिंह की ओर से दायर याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ता ने यूको बैंक की नीलामी में मौजा उल्दा स्थित दो भूखंड खरीदे थे। उनका कहना था कि म्यूटेशन स्लिप में विसंगति होने के कारण उन्होंने बैंक से स्पष्टीकरण मांगा था, लेकिन जवाब नहीं मिलने के कारण उन्हें जमीन का कब्जा नहीं मिल सका।
वहीं, यूको बैंक की ओर से अदालत को बताया गया कि खरीदार को कब्जा देने का प्रयास किया गया था, लेकिन वह स्वयं कब्जा लेने के लिए उपस्थित नहीं हुए। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद जस्टिस आनंद सेन की अदालत ने मामले का निपटारा करते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणी की।
हाईकोर्ट ने इस मामले में क्या कहा
हाईकोर्ट ने कहा कि संबंधित जमीन बैंक के पास बंधक थी और बैंक ने कानून के तहत उसकी नीलामी की। नीलामी प्रक्रिया पूरी होने के बाद खरीदार को बिक्री प्रमाणपत्र (सेल सर्टिफिकेट) जारी किया गया। ऐसे में खरीदार को बिक्री प्रमाणपत्र के आधार पर जमीन का कब्जा लेने का अधिकार है। अदालत ने स्पष्ट किया कि म्यूटेशन में किसी प्रकार की त्रुटि या विसंगति कब्जा देने में बाधा नहीं बन सकती, क्योंकि म्यूटेशन केवल राजस्व रिकॉर्ड की प्रक्रिया है, स्वामित्व का अंतिम प्रमाण नहीं।
अदालत ने यूको बैंक को निर्देश दिया कि वह जमीन का कब्जा सौंपने की प्रक्रिया में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न करे। साथ ही कहा कि कब्जा मिलने के बाद खरीदार संबंधित अंचलाधिकारी के समक्ष नए सिरे से म्यूटेशन के लिए आवेदन कर सकता है। अंचलाधिकारी बिक्री प्रमाणपत्र के आधार पर कानून के अनुसार दाखिल-खारिज की प्रक्रिया पूरी करेंगे।
हाईकोर्ट के इस फैसले को बैंक नीलामी के जरिए संपत्ति खरीदने वाले लोगों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे यह स्पष्ट हो गया है कि यदि नीलामी प्रक्रिया विधिसम्मत है और खरीदार के पास वैध बिक्री प्रमाणपत्र है, तो केवल म्यूटेशन में गड़बड़ी के आधार पर उसे जमीन के कब्जे से वंचित नहीं किया जा सकता।


