रिम्स जमीन घोटाला: हाई कोर्ट सख्त, अफसरों पर FIR, पीड़ितों को मुआवजा देने का आदेश

Dec 26, 2025 08:38 am ISTMohammad Azam लाइव हिन्दुस्तान, रांची
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झारखंड हाई कोर्ट ने रिम्स परिसर के अंदर जमीन के अवैध आवंटन और रजिस्ट्री मामले में कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि इस गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार सभी सरकारी अधिकारियों को जवाबदेह ठहराया जाए।

रिम्स जमीन घोटाला: हाई कोर्ट सख्त, अफसरों पर FIR, पीड़ितों को मुआवजा देने का आदेश

झारखंड हाई कोर्ट ने रिम्स (राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज) परिसर के अंदर जमीन के अवैध आवंटन और रजिस्ट्री मामले में कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि इस गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार सभी सरकारी अधिकारियों को जवाबदेह ठहराया जाए। साथ ही जिन लोगों को बेदखल किया गया और परेशान किया गया, उन्हें सरकारी अधिकारियों और बिल्डरों की ओर से उचित मुआवजा देने का आदेश दिया गया है।

मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की डिवीजन बेंच ने ज्योति शर्मा की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पुलिस को उन अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया है, जिन्होंने कथित तौर पर अस्पताल की जमीन पर कब्जा कराने के लिए बिल्डरों से मिलीभगत की।

कोर्ट ने 20 दिसंबर को दिए फैसले में कहा कि जमीन के रजिस्ट्रेशन से जुड़े अधिकारियों को अधिक सतर्क रहना चाहिए था। उनकी लापरवाही के कारण कई लोगों को रिम्स की अधिग्रहित जमीन से हटाया गया। कोर्ट ने इस बात पर हैरानी और दुख भी जताया कि निर्माण कार्य होते रहने के बावजूद रिम्स प्रशासन लंबे समय तक चुप रहा।

जनहित याचिका 2018 में दायर हुई थी, लेकिन अस्पताल ने कभी कोर्ट को यह जानकारी नहीं दी कि उसकी जमीन पर कब्ज़ा हो चुका है। मामला तब उजागर हुआ जब झारखंड लीगल सर्विसेज अथॉरिटी के सदस्य सचिव ने कोर्ट के निर्देश पर जांच की और पाया कि रिम्स परिसर के अंदर करीब 7 एकड़ जमीन पर कब्जा किया गया है।

इसके बाद हाई कोर्ट ने 3 दिसंबर को प्रशासन को 72 घंटे के भीतर सभी अवैध कब्जे हटाने का आदेश दिया। आदेश मिलते ही जिला प्रशासन हरकत में आया और रिम्स की जमीन पर बनी इमारतों को गिराने की कार्रवाई शुरू की गई। कोर्ट ने यह भी कहा कि ज़िला प्रशासन के पास राजस्व रिकॉर्ड हर समय उपलब्ध थे, इसके बावजूद कोई अधिकारी सामने नहीं आया। निजी पक्षों के पक्ष में बार-बार टाइटल बदले गए और किराया रसीद, राजस्व रिकॉर्ड व गैर-देनदारी प्रमाण पत्रों में हेरफेर किया गया।मामले की अगली सुनवाई 6 जनवरी 2026 को होगी।

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