जन्मजात दिल की बीमारी से जूझ रहे बच्चों की मुफ्त सर्जरी कराएगी झारखंड सरकार, कहां और कबसे होंगे ऑपरेशन?
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के मिशन निदेशक शशि प्रकाश झा ने कहा कि जन्मजात हृदय रोग (सीएचडी) से पीड़ित बच्चों की पहचान कर उन्हें समय पर बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार विशेष अभियान चला रही है।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के मिशन निदेशक शशि प्रकाश झा ने कहा कि जन्मजात हृदय रोग (सीएचडी) से पीड़ित बच्चों की पहचान कर उन्हें समय पर बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार विशेष अभियान चला रही है। इसके तहत 18 वर्ष तक के बच्चों की स्क्रीनिंग कर जरूरतमंद बच्चों की कोच्चि स्थित विशेषज्ञ अस्पताल में नि:शुल्क सर्जरी कराई जाएगी।
अब तक 120 बच्चों की हुई स्क्रीनिंग
शनिवार को शिबू सोरेन स्मृति भवन (टाउन हॉल) में आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने बताया कि शिविर में कोच्चि से आए विशेषज्ञ कार्डियक सर्जनों द्वारा बच्चों की जांच की जा रही है। अब तक लगभग 120 बच्चों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है व जांच का कार्य जारी है। चिकित्सकीय जांच के आधार पर जिन बच्चों को सर्जरी की आवश्यकता होगी, उन्हें उपचार के लिए चयनित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि राज्य स्तर पर एक वर्ष में लगभग 1,000 बच्चों की स्क्रीनिंग एवं सर्जरी कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
259 बच्चों की जांच हुई, 41 की सर्जरी होगी
जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित बच्चों को बेहतर और समय पर उपचार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से गिफ्ट ऑफ लाइफ कार्यक्रम के तहत राष्ट्रीय बाल सुरक्षा कार्यक्रम, झारखंड सरकार, अमृता हॉस्पिटल एवं रोटरी के संयुक्त तत्वावधान में निःशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर लगा। 259 बच्चों की जांच की गई, जिनमें से 41 बच्चों को सर्जरी के लिए चिन्हित किया गया। अमृता हॉस्पिटल के नोडल अधिकारी रो. एस.पी. बगड़िया ने बताया कि गिफ्ट ऑफ लाइफ कार्यक्रम के तहत चयनित बच्चों का उपचार विशेषज्ञ अस्पतालों में कराया जाएगा, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी।
समय पर पहचान व उपचार है जरूरी
मिशन निदेशक ने कहा कि सभी बच्चों को सर्जरी की आवश्यकता नहीं होती। विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा जांच के बाद ही यह तय किया जाता है कि किस बच्चे का तत्काल ऑपरेशन आवश्यक है, किसे कुछ समय बाद उपचार की जरूरत होगी तथा किन बच्चों का इलाज दवा से संभव है। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि यदि किसी बच्चे में जन्मजात हृदय रोग के लक्षण दिखाई दें तो बिना विलंब चिकित्सकीय परामर्श लें। आरबीएसके (राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम) की टीमों के माध्यम से ऐसे बच्चों की पहचान और आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।
बर्थ वेटिंग रूम की करें व्यवस्था
इससे पूर्व मिशन निदेशक ने बोकारो परिसदन में सिविल सर्जन सहित जिले के विभिन्न चिकित्सा पदाधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। उन्होंने सदर अस्पताल में बर्थ वेटिंग रूम की व्यवस्था करने, प्रसव के बाद जच्चा-बच्चा को 48 घंटे तक चिकित्सकीय निगरानी में रखने तथा संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के निर्देश दिए। साथ ही मरीजों के परिजनों के लिए अटेंडेंट बेड की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया। उन्होंने जिले के ट्रॉमा सेंटर को अनुमंडलीय अस्पताल में स्थानांतरित कर संचालित करने, बर्न यूनिट एवं पंचकर्म इकाई को शुरू करने तथा योग आधारित स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देने का निर्देश दिया।
लेखक के बारे में
Ratan Guptaरतन गुप्ता एक डिजिटल हिंदी जर्नलिस्ट/ कॉन्टेंट प्रोड्यूसर हैं। वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान की स्टेट न्यूज टीम के साथ काम कर रहे हैं। वह क्राइम, राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर न्यूज आर्टिकल और एक्सप्लेनर स्टोरीज लिखते हैं।
रतन गुप्ता वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर स्टेट न्यूज टीम में काम करते हैं। इस टीम में हिंदी पट्टी के 8 राज्यों दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, गुजरात से जुड़ी खबरों की कवरेज करते हैं। उनका लेखन खास तौर से क्राइम, राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर केंद्रित रहता है।
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रतन गुप्ता ने बायोलॉजी में ग्रेजुएशन किया है, जिसके बाद उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता की पढ़ाई की है। साइंस बैकग्राउंड होने के कारण उनकी न्यूज और एनालिसिस स्टोरी में साइंटिफिक टेंपरामेंट, लॉजिकल अप्रोच और फैक्ट-बेस्ड सोच साफ दिखाई देती है। वह किसी भी मुद्दे पर रिपोर्टिंग करते समय दोनों पक्षों की बात, मौजूद तथ्यों और आधिकारिक स्रोतों को प्राथमिकता देते हैं, ताकि यूजर तक संतुलित और भरोसेमंद जानकारी पहुंचे।
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