
घाटशिला उपचुनाव; 13 प्रत्याशियों में 9 पहली बार मैदान में, 70% नए चेहरे अजमाएंगे किस्मत
मुख्य मुकाबला फिलहाल सत्तारूढ़ झामुमो के सोमेश चंद्र सोरेन और भाजपा के बाबूलाल सोरेन के बीच है। एक तरफ झामुमो अपने दिवंगत नेता रामदास सोरेन की विरासत पर भरोसा जता रहा है तो दूसरी ओर, भाजपा संगठन और मोदी सरकार की योजनाओं के दम पर मैदान में उतरी है।
घाटशिला विधानसभा उपचुनाव इस बार नए चेहरों की मौजूदगी से और भी दिलचस्प बन गया है। चुनावी मैदान में कुल 13 प्रत्याशी हैं, जिनमें से नौ पहली बार किस्मत आजमा रहे हैं। यानी करीब 70 फीसदी उम्मीदवार राजनीतिक पारी की शुरुआत कर रहे हैं। ये सभी नए प्रत्याशी जनता के बीच खुद को स्थानीय मुद्दों और विकास के एजेंडे पर मजबूत विकल्प के रूप में पेश करने में जुटे हैं।

मुख्य मुकाबला फिलहाल सत्तारूढ़ झामुमो के सोमेश चंद्र सोरेन और भाजपा के बाबूलाल सोरेन के बीच है। एक तरफ झामुमो अपने दिवंगत नेता रामदास सोरेन की विरासत पर भरोसा जता रहा है तो दूसरी ओर, भाजपा संगठन और मोदी सरकार की योजनाओं के दम पर मैदान में उतरी है।
जेएलकेएम मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने में जुटा : झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) के प्रत्याशी रामदास मुर्मू इस बार मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने में जुटे हैं। इसके अलावा, भारत आदिवासी पार्टी के पंचानन सोरेन और पीपुल्स पार्टी ऑफ इंडिया (डेमोक्रेटिक) की पार्वती हांसदा सहित कई निर्दलीय प्रत्याशी भी अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। इनमें अधिकतर उम्मीदवार सामाजिक कार्यकर्ता या क्षेत्रीय स्तर के जनसेवक हैं।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि घाटशिला उपचुनाव के समर में इतने नए चेहरों के मैदान में उतरने से मतों का बिखराव तय है, जिससे मुख्य प्रतिद्वंद्वियों के लिए समीकरण और कठिन हो सकते हैं। अब नजरें इस बात पर टिकी हैं कि जनता परंपरा तोड़ेगी या फिर पुराने दिग्गजों पर ही भरोसा जताएगी।
हालांकि जानकार यह भी मानते हैं कि मुख्य मुकाबल चंपाई सोरेन के पुत्र बाबूलाल सोरेन और झारखंड सरकार के दिवंगत मंत्री स्व. रामदास सोरेन के पुत्र सोमेश चंद्र सोरेन के बीच ही है। वहीं झारखंड लोकतांत्रिक मोर्चा (जेएलकेएल) ने प्रत्याशी उतारकर इस मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है।



