झारखंड के हर विधानसभा क्षेत्र में बनेगा कोल्ड स्टोरेज और मार्केटिंग सेंटर, जानिए सोरेन सरकार का प्लान
झारखंड के कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने चालू वित्तीय वर्ष में सरकार ने हर विधानसभा क्षेत्र में कोल्ड स्टोरेज के साथ मार्केटिंग सेंटर स्थापित करने की योजना बनाई है। इसके लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार कराने की प्रक्रिया चल रही है।

झारखंड के कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने चालू वित्तीय वर्ष में सरकार ने हर विधानसभा क्षेत्र में कोल्ड स्टोरेज के साथ मार्केटिंग सेंटर स्थापित करने की योजना बनाई है। इसके लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार कराने की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन अभी तक मिली रिपोर्ट से विभाग पूरी तरह संतुष्ट नहीं है। कृषि मंत्री ने इसके लिए अधिकारियों को देशभर में बेहतर लॉजिस्टिक और शीत शृंखला व्यवस्था विकसित करने वाली अग्रणी कंपनियों को परामर्श के लिए आमंत्रित कर तकनीकी सुझाव लेने का निर्देश दिया।
20 जिलों में 5000 मीट्रिक टन क्षमता वाले कोल्ड स्टोरेज बनेंगे
मंत्री ने कहा कि राज्य के करीब 20 जिलों में 5,000 मीट्रिक टन क्षमता वाले कोल्ड स्टोरेज बनाए गए हैं। कोल्ड स्टोरेज व मार्केटिंग सेंटर सरकार की एक बड़ी और दीर्घकालिक परियोजना है, जिसमें बड़ी राशि का निवेश होना है। इसलिए इसकी योजना और तकनीकी संरचना ऐसी होनी चाहिए, जिसमें आधुनिक तकनीक, ऊर्जा दक्षता, बेहतर लॉजिस्टिक्स, मार्केटिंग एवं भविष्य की आवश्यकताओं को शुरुआत से ही शामिल किया जाए।
कृषि मंत्री शुक्रवार को नेपाल हाउस स्थित सभागार में सहकारिता प्रभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा कर रही थीं। बैठक में विभागीय बजटीय प्रावधान और व्यय की प्रगति, बेहतर प्रदर्शन करने वाली योजनाओं तथा चालू वित्तीय वर्ष में शुरू नई योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई। मंत्री ने योजनाओं के क्रियान्वयन में आ रही चुनौतियों, कमियों और सुधार की संभावनाओं की जानकारी ली। बैठक में विभाग के सचिव, विशेष सचिव, निबंधक, सहयोग समितियां, झास्कोलैम्प्स, झमकोफेड, सिद्धकोफेड, झास्कोफिश और झारखंड मिल्क फेडरेशन के प्रबंध निदेशक शामिल थे।
लाह उत्पादन को पौधे, 20 डिसमिल में एकीकृत खेती
मंत्री ने झास्कोलैम्प्स की ‘लाह पोषक समृद्धि योजना’ की भी समीक्षा की। इसके तहत लाभुकों को 400 सीमियालता, पांच कुसुम, पांच बेर और 20 कैलियेंड्रा/कैलोथायरस के पौधे दिए जाएंगे। सीमियालता करीब एक वर्ष में लाह उत्पादन योग्य हो जाती है। लगभग 20 डिसमिल भूमि पर एकीकृत खेती को बढ़ावा देकर लाह के साथ अन्य कृषि गतिविधियों से आय के स्रोत बढ़ाने का प्रयास होगा। मंत्री ने सभी योजनाओं में समयबद्ध क्रियान्वयन, पारदर्शिता, तकनीकी गुणवत्ता और किसानों को प्रत्यक्ष लाभ सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
मड़ुआ से बच्चों को पोषण व किसानों को मिलेगा बाजार
सिद्धकोफेड की ओर से प्रधानमंत्री पोषण योजना के तहत सरकारी विद्यालयों में मध्याह्न भोजन के लिए मड़ुआ (रागी) के आटे की आपूर्ति के प्रस्ताव की भी समीक्षा हुई। पायलट परियोजना में रांची, खूंटी और सरायकेला-खरसावां को शामिल किया गया है। शिक्षा विभाग से पत्राचार किया जा चुका है। मंत्री ने कहा कि इससे स्थानीय किसानों के मड़ुआ को सुनिश्चित बाजार मिलेगा और बच्चों को पौष्टिक आहार उपलब्ध होगा।


