रांची में ED और पुलिस आमने-सामने, 20 करोड़ का घोटाला; क्या है पूरा मामला
पेयजल विभाग के पूर्व कर्मी संतोष कुमार के खिलाफ 20 करोड़ से अधिक के गबन के मामले में रांची पुलिस व एसीबी द्वारा जांच की जा रही थी। रांची पुलिस ने ही संतोष को जेल भी भेजा था। इस केस में मनी लाउंड्रिंग के आरोपों की जांच की गई तो तत्कालीन मंत्री, सचिव और विभागीय इंजीनियरों की भूमिका सामने आयी है।

पश्चिम बंगाल के बाद झारखंड में भी ईडी व पुलिस आमने-सामने आ गई है। ईडी ने दावा किया है कि पेयजल विभाग के पूर्व कर्मी संतोष कुमार के खिलाफ 20 करोड़ से अधिक के गबन के मामले में रांची पुलिस व एसीबी द्वारा जांच की जा रही थी। रांची पुलिस ने ही संतोष को जेल भी भेजा था। इस केस में मनी लाउंड्रिंग के आरोपों की जांच की गई तो तत्कालीन मंत्री, सचिव व विभागीय इंजीनियरों की भूमिका सामने आयी है। ईडी के अधिकारियों का दावा है कि इस केस को प्रभावित करने की नीयत से ही केस के अनुसंधान पदाधिकारियों को टारगेट कर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करायी गई है।
एजेंसी का दावा है कि सोमवार को संतोष कुमार को समन भेजकर पूछताछ के लिए बुलाया भी नहीं गया था। लेकिन पूर्व के समन के आधार पर वह स्वयं एजेंसी के कार्यालय पहुंचा। इसके बाद एजेंसी के अफसरों ने उसके व उसकी पत्नी के खाते में आए पैसों के विषय में पूछताछ शुरू की तो वह सवालों के जवाब देने से इंकार करता रहा। इसी दौरान उसने शीशे की पानी बोतल उठाकर सिर पर खुद फोड़ा। ईडी के अफसरों का दावा है कि उसे सदर अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उसे गंभीर स्थिति में नहीं होने की बात कह घर जाने कहा। इसके बाद ईडी के अफसर उसे लेकर कार्यालय पहुंचे। तब उसने लिखित देकर कहा कि हाइपरटेंशन व बीपी के कारण उसने ऐसी हरकत की। इसके बाद उसे छोड़ दिया गया।
ईडी अधिकारियों पर सिर फोड़ने का लगाया आरोप
संतोष कुमार ने ईडी के सहायक निदेशक प्रतीक और सहायक शुभम पर मारपीट का आरोप लगाते हुए एयरपोर्ट थाना में प्राथमिकी दर्ज करायी है। चुटिया के रहने वाले संतोष कुमार की ओर से थाना में दिए आवेदन में कहा गया है कि प्रतीक ने उन्हें 12 जनवरी को फोन कर ईडी कार्यालय बुलाया था। वह सुबह पौने दस बजे तक ईडी कार्यालय में उपस्थित हुए। दोपहर में सहायक निदेशक ने उन्हें अपने कार्यालय में बुलाया। उस वक्त सहायक भी मौजूद थे। उनसे पूछताछ की गई। दोनों अधिकारी उन पर आरोप कबूलने का दबाव डाल रहे थे। आरोप है कि इंकार करने पर अधिकारियों ने गाली-गलौज करते हुए मारपीट की। जान से मारने की नीयत से डंडे से कई बार सिर पर मारा गया। उनका सिर फट गया। खून बहने के बाद ईडी के लोग उन्हें सदर अस्पताल ले गए और इलाज भी कराया। वहां पर उन्हें धमकी दी गई कि अगर वह मारपीट की बात पुलिस, मीडिया को बताया तो परिवार वालों को भी जेल भेज देंगे। इलाज कराने के बाद उन्हें दोबारा ईडी कार्यालय ले जाया गया, वहां उनके शर्ट से खून साफ किया गया और नया टी शर्ट पहनाया गया। 16 को फिर से हाजिर होने को कहा है।

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