Hindi Newsझारखंड न्यूज़jharkhand cnt act implemented in 1908 during british era will celebrate 117th anniversary know all about it
271 धाराएं, 57 बार संशोधन; अंग्रेजों का लागू किया CNT एक्ट क्या है? पूरी डिटेल

271 धाराएं, 57 बार संशोधन; अंग्रेजों का लागू किया CNT एक्ट क्या है? पूरी डिटेल

संक्षेप: सीएनटी एक्ट को लेकर झारखंड जनजातीय कल्याण व शोध संस्थान (वर्तमान में डॉ. रामदयाल मुंडा जनजातीय कल्याण शोध संस्थान) द्वारा राज्य गठन के कुछ वर्षों बाद एक विश्लेषणात्मक शोध अध्ययन रिपोर्ट भी तैयार की गई थी। यह रिपोर्ट 108 पन्नों की है। 

Tue, 11 Nov 2025 10:08 AMUtkarsh Gaharwar हिन्दुस्तान, रांची
share Share
Follow Us on

छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम (सीएनटी एक्ट), जिसे 1908 में लागू किया गया था, वह बंगाल काश्तकारी अधिनियम-1885 की तर्ज पर बनाया गया है। सीएनटी एक्ट वास्तव में बंगाल अधिनियम की कार्बन कॉपी ही है। यह भ्रम है कि बंगाल एक्ट-6 1908 के संदर्भ में कई तरह की भ्रांतियां हैं, जबकि सीएनटी एक्ट में केवल अनुसूचित जनजाति के संदर्भ में कुछ विशिष्ट प्रावधान जोड़े गए हैं। छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम में कुल 271 धाराएं हैं।

LiveHindustan को अपना पसंदीदा Google न्यूज़ सोर्स बनाएं – यहां क्लिक करें।

सीएनटी एक्ट को लेकर झारखंड जनजातीय कल्याण व शोध संस्थान (वर्तमान में डॉ. रामदयाल मुंडा जनजातीय कल्याण शोध संस्थान) द्वारा राज्य गठन के कुछ वर्षों बाद एक विश्लेषणात्मक शोध अध्ययन रिपोर्ट भी तैयार की गई थी। यह रिपोर्ट 108 पन्नों की है, जिसमें सीएनटी एक्ट का इतिहास, अध्ययन की विधि, अध्ययन का क्षेत्र, वर्तमान स्वरूप, जनजातीय भूमि संबंधी समस्याएं सहित कई विषयों का समावेश किया गया था।

छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम 11 नवंबर 1908 को लागू किया गया था। जिस समय यह अधिनियम लागू हुआ था, उस समय 90 प्रतिशत आबादी की आजीविका का साधन कृषि था। मंगलवार को सीएनटी एक्ट के लागू होने की 117वीं वर्षगांठ पूरी हो जाएगी। ज्ञात हो कि जनजातीय विद्रोहों के फलस्वरूप अंग्रेजों ने सीएनटी एक्ट लागू किया था। इस एक्ट का प्रारूप (ड्राफ्ट) तैयार करने का श्रेय फादर जॉन हॉफमैन को दिया जाता है।

सीएनटी एक्ट जो 1908 से 1947 तक लागू रहा, के संबंध में एक रिपोर्ट में यह उल्लेख है कि यह नहीं कहा जा सकता कि एक्ट के लागू होने के शुरुआती दौर में भी भूमि संबंधी समस्याओं को सुलझाने में पूर्ण सफलता प्राप्त हुई थी। इस अधिनियम के लागू होने के बाद जनजातीय भूमि के हस्तांतरण पर पूर्ण रूप से रोक लगा दिया गया था। इस संबंध में रिवीजन सर्वे के आधार पर एफईए टेलर ने एक टिप्पणी की, जिसके बाद 1938 में एक्ट के कई प्रावधानों में संशोधन किए गए। 1947 में भी एक्ट के प्रावधानों में सुधार किया गया, जिसमें रैयतों के इस्तीफा करने से पूर्व उपायुक्त की अनुमति लेना आवश्यक बनाया गया। आदिवासी कानून मामलों के विशेषज्ञ वरीय अधिवक्ता रश्मि कात्यायन के अनुसार, आज तक सीएनटी एक्ट में करीब 57 बार प्रमुख रूप से संशोधन किए गए हैं। इसमें विशेष रूप से 1929, 1938, 1948 और 1969 के संशोधन शामिल हैं।

Utkarsh Gaharwar

लेखक के बारे में

Utkarsh Gaharwar
एमिटी और बेनेट विश्वविद्यालय से पत्रकारिता के गुर सीखने के बाद अमर उजाला से करियर की शुरुआत हुई। अमर उजाला में बतौर एंकर सेवाएं देने के बाद 3 साल नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर काम किया। वर्तमान में लाइव हिंदुस्तान में डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हूं। एंकरिंग और लेखन के अलावा मिमिक्री और थोड़ा बहुत गायन भी कर लेता हूं। और पढ़ें
इंडिया न्यूज़ , विधानसभा चुनाव और आज का मौसम से जुड़ी ताजा खबरें हिंदी में | लेटेस्ट Hindi News, बॉलीवुड न्यूज , बिजनेस न्यूज , क्रिकेट न्यूज , धर्म ज्योतिष , एजुकेशन न्यूज़ , राशिफल और पंचांग पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।