
पुलिस ने बरसाईं थीं गोलियां, अब होगा सम्मान; कमेटी करेगी खारसावां शहीदों के परिवार की पहचान
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि खारसावां के आदिवासी शहीदों के परिवारों और उनसे जुड़े लोगों की पहचान करने के लिए जल्द ही एक समिति का गठन किया जाएगा। सोरेन ने उन आदिवासी शहीदों को पुष्पांजलि अर्पित की जो 1948 में इसी दिन पुलिस गोलीबारी में शहीद हो गए थे।
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि खारसावां के आदिवासी शहीदों के परिवारों और उनसे जुड़े लोगों की पहचान करने के लिए जल्द ही एक समिति का गठन किया जाएगा। सोरेन ने उन आदिवासी शहीदों को पुष्पांजलि अर्पित की जो 1948 में इसी दिन पुलिस गोलीबारी में शहीद हो गए थे।
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने गुरुवार को कहा कि खारसावां के आदिवासी शहीदों के परिवारों को भी गुआ पुलिस गोलीबारी कांड के शहीदों की तरह सम्मान दिया जाएगा। कहा कि शहीदों के परिवारों और उनसे जुड़े लोगों की पहचान करने के लिए जल्द ही एक समिति का गठन किया जाएगा।
सोरेन ने 1948 में इसी दिन पुलिस गोलीबारी में शहीद हुए उन आदिवासी शहीदों को पुष्पांजलि अर्पित की जो शहीद सरायकेला-खारसावां जिले के ओडिशा में विलय का विरोध कर रहे थे और अलग झारखंड राज्य की मांग कर रहे थे।
1948 में नव वर्ष के दिन सैकड़ों आदिवासी सेराइकेला-खरसावां जिले के ओडिशा में विलय के विरोध में और अपने जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए एक अलग झारखंड राज्य के गठन की मांग को लेकर खरसावां हाट मैदान में एकत्र हुए थे। उसी दौरान पुलिस ने उन पर गोली चला दी थी।
पत्रकारों से बात करते हुए सोरेन ने कहा कि शहीदों के परिवारों और उनसे जुड़े लोगों की पहचान के लिए जल्द ही एक समिति का गठन किया जाएगा। सोरेन ने कहा कि शहीदों के परिवारों को ठीक उसी तरह सम्मानित किया जाएगा जैसे 8 सितंबर 1980 को हुए गुआ गोलीबारी कांड में शहीद हुए शहीदों के परिवारों को गया था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आदिवासी योद्धाओं ने आदिवासी समुदाय के अधिकारों, उनके जल, जंगल और जमीन की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी। आदिवासी समुदाय को उन पर गर्व है। सोरेन ने कहा कि पूरे राज्य से लोग शहीद स्थल पर आदिवासी नायकों को श्रद्धांजलि अर्पित करने आते हैं, जिन्होंने आदिवासियों के हित के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया।
सोरेन ने कहा कि आदिवासी शहीदों को न तो भुलाया जा सकता है और न ही उनकी स्मृति कभी मिटाई जा सकती है। आज आदिवासी उन्हीं के बलिदान के कारण जीवित हैं। साल के अधिकांश समय बंद रहने वाले शहीद स्थल के बारे में पूछे जाने पर सोरेन ने कहा कि इसे यादगार बनाने के लिए इसका विकास किया जाएगा। वर्तमान में स्थल पर निर्माण कार्य चल रहा है। हम इसे जल्द ही जनता के लिए खोल देंगे। हम नहीं चाहते थे कि इस स्थल का दुरुपयोग हो।





