सोहराय को देखते हुए मांदर बनाने का कार्य तेज
जामताड़ा,प्रतिनिधि।आदिवासियों का प्रमुख पर्व सोहराय के दौरान पारंपरिक वाद्य यंत्र मांदर की थाप पर आदिवासी महिला व युवती नृत्य करती है। इन दिनों ग्रामी

सोहराय को देखते हुए मांदर बनाने का कार्य तेज जामताड़ा,प्रतिनिधि।
आदिवासियों का प्रमुख पर्व सोहराय के दौरान पारंपरिक वाद्य यंत्र मांदर की थाप पर आदिवासी महिला व युवती नृत्य करती है। इन दिनों ग्रामीण इलाकों में कारीगर द्वारा मांदर का निर्माण किया जा रहा है। जामताड़ा जिला मुख्यालय से करीब 05 किलोमीटर की दूरी पर स्थित गोपालपुर गांव के सीमांत दास जो वाद्य यंत्र बनाते हैं। वह मांदर बनाने में जुट गए हैं। उन्होंने बताया कि मांदर के लिए एडवांस बुकिंग हुई है। इस कारण हम लोग दिन रात मेहनत कर मांदर बना रहे हैं। बताया कि सिर्फ सोहराय के अवसर पर ही 30 से 40 जोड़ा मांदर तथा अन्य वाद्य यंत्र बनाकर बेच लेते हैं।
पुश्तैनी धंधा कर रहे हैं सीमांत दास:
सीमांत दास ने बताया कि ढोलक बनाने का उनका पुश्तैनी धंधा है। इसके पहले उनके पिताजी तथा दादाजी ढोलक बनाने का काम करते थे। बताया कि दो मांदर तथा एक ढोल की कीमत₹7000 रूपए है। उन्होंने बताया कि सालभर वह ढोल तथा अन्य वाद्य यंत्र बनाकर भेजते हैं, जिससे उनके परिवार का गुजारा चलता है।
फोटो जामताड़ा 05: गोपालपुर गांव में वाद्य यंत्र मांदर का निर्माण करते कारीगर।
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