
सोहराय के तीसरे दिन में कुंडहित क्षेत्र में हुई खुण्टउ पूजा
कुंडहित के आदिवासी बहुल गांवों में सोहराय महापर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है। यह पांच दिवसीय उत्सव खरीफ फसल की कटाई के बाद मनाया जाता है। पहले दिन पवित्र स्नान और दूसरे दिन पूजा की जाती है। तीसरे दिन खुण्टउ पूजा के दौरान गांव के लोग बैल को सजाते हैं और पारंपरिक नृत्य करते हैं।
कुंडहित, प्रतिनिधि।प्रखंड क्षेत्र के आदिवासी बहुल गांवो में सोहराय की धूम परवान पर है। खरीफ फसल की कटाई के बाद जनवरी महीने संक्रांति के पूर्व आदिवासी समुदाय का पांच दिवसीय महापर्व सोहराय सामूहिक तौर पर काफी धूमधाम के साथ मनाया जाता है। सोहराय के मौके पर समुदाय के लोग एक दूसरे के काफी करीब आते हैं। शनिवार को उम के मौके पर पवित्र स्नान के साथ पांच दिवसीय सोहराय पर्व का शुभारंभ हुआ। दूसरे दिन रविवार को मरांग बुरु, कुलदेवता एवं पूर्वजों की पूजा कर गौशाला की साफ-सफाई कर पूजा की गई। सोमवार को महापर्व सोहराय के तीसरे दिन आदिवासी समाज के लोग खुण्टउ पूजा किया गया।
मौके पर ताराबाद गांव के माझी हड़ाम गुमड़ा टुडू व नायकी लक्खिश्वर टुडू ने बताया कि सोमवार को पर्व का तीसरा दिन परंपरा के अनुसार गांव के लोग बैल के गले में धान के बालियों और गुड़ कू पीठे की माला पहनाते हैं। विभिन्न रंगों से रंगे बैलो को गांवो के बीचो-बीच खूंटे से बांधा जाता है इस दौरान ढोल और मांदर की थाप पर बैल उछलते नाचते हुए पीठे को तोड़ने का प्रयास करते हैं। इस प्रकार खुण्टउ की परंपरा निभाई जाती है। खुण्टउ के मौके पर ताराबाद सहित प्रखंड क्षेत्र के तमाम आदिवासी बहुल गांवो के युवक-युवती एवं बुजुर्ग ने परंपरागत तरीके से मांदर की थाप पर झूमते गाते एवं नृत्य करते नजर आए। मौके पर जोक माझी महादेव मरांडी, पराणिक जयदेव मुर्मू सहित गांव के तमाम महिला पुरुष बच्चे उपस्थित थे।

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