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चार माह से है कम मुद्रांक के स्टांप की किल्लत

लगभग चार महीने से कचहरी में स्टांप की किल्लत बनी हुई है। नन ज्यूडिशियल स्टांप उपलब्ध नहीं है। कुछ अधिवक्ता दूसरे जिलों से स्टांप मंगा कर काम चला रहे हैं। जिले में 04 स्टांप वेंडर हैं। इन्हें ट्रेजरी से कम मुद्रांक के स्टांप नहीं मिल रहे है। इसकी वजह से वे दुकान बंद करने को विवश हैं। स्टांप की किल्लत से कचहरी में वकील और मुवक्किल दोनों को ही काफी परेशानी हो रही है। अधिवक्ताओं के मुताबिक स्टांप उपलब्ध नहीं होने से नए केस दायर करने में दिक्कत हो रही है। इसके अलावे केस से संबंधित नकल निकालने सहित अन्य कामों में परेशानी हो रही है। सरकार की ओर से स्टॉक होल्डिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया एवं उनके द्वारा निर्धारित बैंकों और डाकघरों के माध्यम से ई-स्टांप की बिक्री की जा रही है। पर अधिवक्ताओं का कहना है कि कम मूल्य के ई-स्टांप की बिक्री की जा रही है। परंतु बैंकों से ई-स्टांप सही तरीके से उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। इससे स्टांप लेने में समय ज्यादा लग रहा है और खर्च हो रहा है। क्या कहते हैं वेंडर: यहां स्टांप पेपर्स की बिक्री करने वाले वेंडरों की मानें तो जिले में इस साल चार महीने से ही स्टांप पेपर की किल्लत बनी हुई है। वेंडरों का कहना है कि 05,10 और 20 रुपए के मूल्य के स्टांप उपलब्ध नहीं है। जिस कारण लोगों के 10 व 20 रुपए के मूल्य नन ज्यूडिशियल स्टांप के स्थान पर 50 व 100 रुपए के नन ज्यूडिशियल स्टांप खरीदने पड़ रहे हैं। बैंक से स्टांप पेपर खरीदने में लगता है दिनभर का समय: सरकार ने स्टांप पेपर्स की सुलभता बनाए रखने के लिए साथ बैंक ऑफ बड़ौदा, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया और केनरा बैंक को स्टेक होल्डर बनाकर ई-स्टांप जारी करने के लिए अधिकृत किया है। बैंक ऑफ बड़ौदा की ओर से स्टांप जारी भी किया जा रहा है। लेकिन बैंक से स्टांप खरीदने की प्रक्रिया इतनी जटिल है कि स्टांप पेपर खरीदने में दिनभर का समय लग जाता है।

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  • Web Title:Short stamp stamp shortage is less than four months