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स्कूलों के चापाकल के पानी की होगी जांच

निजी स्कूलों के बच्चों को भले ही फिल्टर या आरओ का पानी नसीब होता हो, लेकिन सरकारी स्कूल के बच्चें अभी भी स्कूल के हैंडपंप, टंकी के पानी के भरोसे ही हैं। यदि यह पानी दूषित होता है तो बच्चों के स्वास्थ्य पर भी असर पड़ता है। अब इस समस्या से निजात पाने के लिए शिक्षा विभाग ने अपने सभी स्कूलों में उपयोग किए जा रहे पानी की लैबोरेटरी जांच की तैयारी कर रही हैं। सभी स्कूलों के सचिव को स्कूल के पानी की जांच पेयजल विभाग के प्रयोगशाला में जांच कराने का निर्देश दिया हैं। स्वच्छता पखवारा के तहत जारी हुए निर्देश: पेयजल एवं स्वच्छता विभाग द्वारा इन दिनों मनाए जा रहे स्वच्छता पखवारा कार्यक्रम के तहत सरकार के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की ओर से डीएसई कार्यालय को पत्र भेजकर जिले के सभी प्राथमिक, मध्य व उत्क्रमित उच्च विद्यालयों के बच्चों के लिए विद्यालय में हैंडपंप के पानी की गुणवत्ता की जांच का निर्देश दिया है। यह निर्देश मिलने के साथ ही जिला शिक्षा अधीक्षक कार्यालय की ओर से त्वरित कार्रवाई करते हुए सभी प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी के कार्यालय को पत्राचार किया गया है। पिछले वर्ष भी हुई थी जांच: पिछले वर्ष जिलेभर में 29 स्कूलों के चापाकल के पानी की जांच हुई थी। हालांकि पानी की जांच के बाद उससे संबंधित रिपोर्ट से विभाग को अवगत नहीं कराया गया। अबतक विभाग भी यह बताने मे सक्षम नहीं है कि जिन 29 विद्यालयों के पानी की जांच करवाई गई, उसमें से कितने विद्यालयों के चापाकल का पानी पीने योग्य है और कितने का पीने योग्य नहीं है। लिहाजा इस बार जिले के सभी 1109 स्कूलों के चापाकल के पानी की जांच करवाने की तैयारी है। इस स्थिति में यह सवाल विद्यालय के शिक्षकों के जहन में एक बार फिर कौंधने लगा है कि पानी की जांच रिपोर्ट मिलेगी या नहीं। जांच रिपोर्ट मिलने से यह पता चल सकेगा कि विद्यालय के चापाकल से पीने योग्य पानी मिल रहा है या दूषित पानी पी रहे हैं।

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  • Web Title:Schools will have access to tappal water