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शव को सुरक्षित रखने के लिए नहीं बन सका है पोस्टमार्टम हाउस

शव को सुरक्षित रखने के लिए नहीं बन सका है पोस्टमार्टम हाउस

जिले में शवों को सुरक्षित रखने के लिए शहगृह नहीं है। जिस कारण जिले में दुर्घटना या अन्य कारणों से होने वाली मौत के बाद पोस्टमार्टम हाउस के बाहर खुले आसमान के नीचे शव को रखा जाता है। यहां तक कि सदर अस्पताल में इलाज के दौरान किसी की मौत हो जाती है तो परिजनों के इंतजार में मरीजो के बीच बेड पर ही या फिर अस्पताल के किसी कोने में शव को रखना पड़ता है। जबकि अस्पताल के वार्ड में अन्य कई मरीज भर्ती रहते हैं। जिनके बीच ही शव को छोड़ दिया जाता है। इसके बावजूद भी अब तक जिले में सरकारी स्तर पर शवगृह के निर्माण को लेकर कोई पहल नहीं हो रही है। सरकारी आंकडों के अनुसार जिले भर में औसतन चार से पांच लोगों की मौत सड़क दुघर्टना में होती है। यहां तक कि लावारिस शवों को रखने में काफी परेशानी होती है। स्थिति यह है कि शवों को पोस्टमार्टम से पहले पुलिस द्वारा लाए गए वाहन या भाड़े के वाहनों में खुले आसमान के नीचे घंटों तक शव को रखने के लिए लोग मजबूर है।

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  • Web Title:Post mortem house could not be made to protect the body