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मौसम के बदलते मिजाज से लोग परेशान बढ़ने लगा दिन का तापमान, रातें रह रही सर्द

मौसम के बदलते मिजाज से लोग परेशान बढ़ने लगा दिन का तापमान, रातें रह रही सर्द

संक्षेप:

जामताड़ा। प्रतिनिधि मौसम के मिजाज में तीन-चार दिनों से बदलाव देखा जा रहा है। दिन गर्म हो रही है और राते सर्द। दिन में धूप, गर्मी और पछुआ हवा जहां लोगों को

Jan 13, 2026 11:06 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, जामताड़ा
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मौसम के बदलते मिजाज से लोग परेशान बढ़ने लगा दिन का तापमान, रातें रह रही सर्द जामताड़ा। प्रतिनिधि मौसम के मिजाज में तीन-चार दिनों से बदलाव देखा जा रहा है। दिन गर्म हो रही है और राते सर्द। दिन में धूप, गर्मी और पछुआ हवा जहां लोगों को परेशान कर रही है। वही शाम ढलते हीं कनकनी बढ़ने लगती है। सूरज ढलने के साथ हीं तापमान में गिरावट आने लगती है। जिसका सेहत पर असर पड़ने लगा है। खासकर कम उम्र के बच्चे, बुजुर्ग और बीमार लोग इससे विशेष प्रभावित होने लगे हैं। जिससे सांस की तकलीफ, खांसी, कफ इत्यादि की शिकायत के मामले बढ़ने लगे हैं।

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इस तरह के मरीज की संख्या भी बढ़ने लगी है। दिन का तापमान 18-19 डिग्री से बढ़कर 23 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया है। वही रात का तापमान 7 से 8 डिग्री सेल्सियस रह रहा है। तीन-चार दिनों से दिन का तापमान 4 से 5 डिग्री सेल्सियस बढ गया है। वही शाम ढलते ही तापमान में गिरावट शुरू होती है जो देर रात 8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा है। वही सुबह से शाम तक बह रहे पछुआ हवा भी लोगों को कम परेशान नहीं कर रही है। जिससे सुबह जल्दी उठकर मॉर्निंग वॉक पर निकलने वाले लोगों पर भी इसका असर देखने को मिल रहा है। विशेष कर बुजुर्ग लोग इससे प्रभावित हो रहे हैं। ऐसे समय में चिकित्सक का कहना है कि अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, अप्पर रेस्पिरेट्री ट्रैक्ट में इंफेक्शन के मामले बढ़ने लगते हैं। इससे बचने की आवश्यकता है। बता दें कि सदर अस्पताल हो या निजी क्लिनिक हर जगह इलाज के लिए पहुंचने वाले मरीजों में अधिकांश कफ, खांसी, दमा, सर्दी, बुखार से संबंधित मामले पाए जाते हैं। चिकित्सक भी ऐसे मौसम में लोगों को विशेष ध्यान रखने का परामर्श दे रहें हैं। सदर अस्पताल के चिकित्सा पदाधिकारी डॉ दुर्गेश झा ने बताया कि ऐसा मौसम पूर्व से बीमार, बुजुर्ग और छोटे बच्चों को आसानी से अपने चपेट में ले लेता है। उन्होंने कहा कि ऐसे मौसम में लापरवाही कहीं से उचित नहीं है। मॉर्निंग वॉक के लिए जो भी लोग निकालते हैं इस बात का विशेष ध्यान रखें कि सूरज निकलने के बाद ही निकले। ऐसे में कार्डियक अरेस्ट, ब्रेन स्ट्रोक इत्यादि का खतरा ज्यादा रहता है।