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किससे करना है व्यापार, रैंकिंग बताएगा उपाय

किन व्यापारियों से माल खरीदना है? माल खरीदने वाले डीलर विक्रेताओं की रैकिंग देखकर इसका निर्णय ले सकते हैं। दरअसल, देश में पहली जुलाई से गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) क्रियान्वित हो रहा है। इसके आने के बाद हर एक व्यापारी को उसके रिकार्ड के आधार पर रैंकिंग मिलेगी। इससे पता चलेगा कि किस विक्रेता से माल खरीदना है, क्योंकि जीएसटी के तहत हर एक व्यापारी को सभी खरीद-बिक्री का ब्योरा अपने पास रखना है। अगर किसी व्यापारी ने किसी डीलर से पांच लाख का माल खरीदा। लेकिन डीलर ऑनलाइन चार लाख रुपये का विवरण दिखा रहा है तो उसका नुकसान विक्रेता को होगा। इस मिसमैच को ठीक करने के लिए भी व्यापारियों को वक्त तो मिलेगा लेकिन उनकी रैंकिंग खराब होगी। विभाग ही देगा रैंक : जीएसटी प्रभावी होने के बाद व्यापारियों को मासिक, त्रिमासिक और वार्षिक ऑनलाइन रिटर्न भरना होगा। जो व्यापारी सभी महत्वपूर्ण दस्तावेज की जानकारी बिना कुछ छिपाए विभाग को देते हैं और समय पर टैक्स भरते हैं, विभाग उन्हें बेहतर रैकिंग देगा, जबकि खराब प्रदर्शन वाले व्यापारियों की रैंकिंग में कटौती होगी। विवरण अपडेट पर अच्छी रैंकिंग : सेल्स एंड सर्विस टैक्स के अधिवक्ता मानव केडिया बताते हैं कि जीएसटी के तहत अब व्यापारियों को रैंकिंग भी मिलेगी। बेहतर रैंकिंग के लिए व्यापारियों को ही अपने सभी विवरण को अपटूडेट रखना होगा। समय पर टैक्स देने और सही विवरण पर उन्हें बेहतर रैंकिंग मिलेगी, लेकिन गड़बड़ी पर रैंकिंग भी खराब होगी। व्यापारी चाहें तो रैंकिंग देखकर व्यापार कर सकेंगे।

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