पटमदा में पेयजल संकट गहराया, कुमीर सबर टोला समेत दो जलमीनार खराब
पटमदा प्रखंड के बारूबेड़ा और नेकड़ाकोचा गांवों में जलमीनार बंद होने से पेयजल संकट गहरा गया। ग्रामीणों को एक महीने तक पानी नहीं मिला। रविवार को तकनीकी खराबी दूर करने के बाद जलापूर्ति फिर से शुरू हुई। कुमीर गांव के अन्य जलमीनार भी छह महीने से खराब हैं, जिससे महिलाओं को गर्मी में पानी लाने में कठिनाई हो रही है।

पटमदा प्रखंड के कई गांवों में खराब जलमीनारों के कारण पेयजल संकट गहराता जा रहा है। बारूबेड़ा और नेकड़ाकोचा गांव में करीब एक माह से जलमीनार बंद रहने के कारण ग्रामीणों को पानी के लिए परेशानी उठानी पड़ रही थी। रविवार को तकनीकी खराबी दूर होने के बाद दोनों गांवों में फिर से जलापूर्ति शुरू हो सकी, जिससे ग्रामीणों को राहत मिली। कुमीर गांव के कोचाकुल्ही और सबर टोला स्थित दो अन्य जलमीनार पिछले करीब छह माह से खराब पड़े हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उपकरण खराब होने के कारण अब तक मरम्मत नहीं हो सकी है। खासकर महिलाओं को भीषण गर्मी के इस मौसम में दूर से पानी लाकर काम चलाना पड़ रहा है।
ग्रामीणों द्वारा बार-बार जनप्रतिनिधि एवं विभाग को सूचित किए जाने के बावजूद मरम्मत नहीं होने से आक्रोश है। इस संबंध में प्रभारी बीडीओ डॉ. राजेंद्र कुमार दास ने सोमवार से मिस्त्री भेजकर मरम्मत कार्य शुरू कराने का आश्वासन दिया है। दूसरी ओर, रविवार को बारूबेड़ा और नेकड़ाकोचा गांव पहुंचे जेएलकेएम के पूर्व प्रत्याशी एवं पेशे से इलेक्ट्रिकल इंजीनियर विनोद स्वांसी ने तकनीकी खराबी को ठीक करने में सहयोग किया। मरम्मत के बाद जलमीनार चालू हो गई और लंबे समय बाद गांवों में पानी की आपूर्ति बहाल हो सकी।
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