
156वें सृजन संवाद में उर्मिला शिरीष की लेखन यात्रा पर चर्चा
जमशेदपुर : साहित्य, सिनेमा एवं कला संस्था ‘सृजन संवाद’ में 23 दिसंबर की शाम 156वीं गोष्ठी में उर्मिला शिरीष की लेखन यात्रा पर चर्चा हुई। स्ट्रीमयार्ड
जमशेदपुर। साहित्य, सिनेमा एवं कला संस्था सृजन संवाद में 23 दिसंबर की शाम 156वीं गोष्ठी में उर्मिला शिरीष की लेखन यात्रा पर चर्चा हुई। स्ट्रीमयार्ड तथा फेसबुक लाइव पर भोपाल से प्रसिद्ध लेखिका उर्मिला शिरीष ने हरियश राय एवं राजेश राव से संवाद किया। साथ ही श्रोताओं-दर्शकों के प्रश्नों के उत्तर भी दिए। डॉ. विजय शर्मा ने उर्मिला शिरीष के लेखन की चर्चा की। संवादी हरियश राय ने उर्मिला शिरीष की कहानियों एवं उपन्यास पर अपनी बात रखी। उन्होंने लेखिका की रचनाओं में करुणा तत्व को विशेष रूप से रेखांकित किया। कहा कि उनका लेखन परिवार में स्त्री के वजूद, उसके सम्मान की मांग करता है।
उनकी कहानियां कहती हैं कि सामंती मानसिकता बदलनी चाहिए, स्त्री को संपत्ति में अधिकार मिलना चाहिए। दूसरे संवादी राजेश राव ने विशेष रूप से उर्मिला शिरीष की कहानियों के नारी पात्र पर बात रखी। उन्होंने कहा कि इन कहानियों की पात्र अपने जीवन में आगे बढ़ना चाहती है, कुछ करना चाहती है, सपने देखती है और इसके लिए जी-जान लगा देती है। उर्मिला शिरीष ने बताया कि उन्होंने बहुत पढ़ा है, रामचरित मानस-महाभारत, दर्शन से लेकर रजनीश तक को। उनपर बहुत तरह के प्रभाव रहे हैं, खासकर बुद्ध से वे बहुत प्रभावित हुईं। चेखव उनके पसंददीदा लेखक हैं। यात्राओं के अनुभव असर डालते हैं। वे एक बार में एक ही काम करती हैं, पढ़ना निरंतर चलता रहता है। दिल्ली से डॉ. रक्षा गीता ने कार्यक्रम का संचालन किया तो डॉ. विजय शर्मा ने स्वागत एवं धन्यवाद ज्ञापन के साथ बताया कि अगली गोष्ठी में सिनेमा पर बात होगी।

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