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कोशिश है बंदी स्वावलंबी बनकर जेल से निकलें : जस्टिस अपरेश सिंह

जेल के बंदियों और कैदियों को प्रशिक्षित कर उन्हें कम से कम ऐसा बना देना है कि जब वे बाहर निकलें तो खुद को अपने पैरों पर खड़ा पाएं। इस दिशा में घाघीडीह सेंट्रल जेल में शुरू हुआ प्रशिक्षण केन्द्र एक कड़ी है।

इस पूरी योजना का नाम एक पहल दिया गया है जो अपने आप में जेल की नई दिशा को दर्शाता है। ये बातें झारखंड उच्च न्यायालय के जस्टिस अपरेश कुमार सिंह ने रविवार को घाघीडीह जेल परिसर में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए कहीं। उन्होंने कहा कि जेल में कैदी हुनर सीखेंगे। जब बाहर निकलेंगे तो उनके पास एक हुनर होगा, जो उनकी जीविका के माध्यम को प्रशस्त करेगा।

इससे पहले जेल में प्रशिक्षण केन्द्र के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए जस्टिस अपरेश कुमार सिंह ने कहा कि राष्ट्र को विकसित करने के लिए हर वर्ग को विकसित करना आवश्यक है। उद्घाटन समारोह में धन्यवाद ज्ञापन प्रधान जिला न्यायाधीश मनोज कुमार ने किया। कार्यक्रम में उपायुक्त अमित कुमार, एसएसपी अनूप बिरथरे सहित अन्य न्यायिक पदाधिकारी मौजूद थे। कार्यक्रम के बाद जस्टिस अपरेश सिंह ने जेल के अंदर चल रही कपड़ा सिलाई, एल्युमिनियम बर्तन बनने के केन्द्र का भ्रमण किया। वे बेकरी भी गए। वहां बंदियों और कैदियों को कार्यों की सराहना की। इस दौरान एक बंदी शादाब ने जस्टिस की बनाई हुई तस्वीर जेल अधीक्षक सत्येन्द्र चौधरी के माध्यम से जस्टिस भेंट की, जिसे देखकर वे काफी खुश हुए।

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  • Web Title:Try to get prisoner self-reliant from jail: Justice Aparish Singh