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सूरजकुंड मेले में दिखेंगे कोल्हान के हजार रंग

अंतरराष्ट्रीय सूरजकुंड मेले में कोल्हान के हजारों रंग दिखेंगे। विशेषकर वन उत्पादों को बढ़ावा देने का पर्यटन विभाग ने निर्णय लिया है। झारखंड के विभिन्न इलाकों से खासकर कोल्हान में तैयार होने वाले वन उत्पादों को मेले में ले जाने की हिदायत दी गई है। एक से 15 फरवरी तक मेला का आयोजन होगा।

कोल्हान में बनने वाले महुआ तेल, मुजकुंब, साल पत्ते की टोपी व जंगली जड़ी बूटियां झारखंड के स्टॉल पर दिखेंगे। सजावटी वस्तुएं, सौंदर्य प्रसाधन, शहद, चांदी के आभूषण, टेराकोटा के आइटम भी मिलेंगे। सूरजकुंड मेले में 2107 में झारखंड को थीम स्टेट बनाया गया था, जिसमें वन उत्पादों की काफी मांग देखी गई थी। वन उत्पाद तैयार करने वाले लोगों से उत्पादों की सूची पर्यटन विभाग को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।

प्राकृतिक सौंदर्य प्रसाधन भी रहेगा

जंगली उत्पादों के सौंदर्य प्रसाधन भी मेले में मिलेंगे। इसमें फुट स्क्रब, फेस पैक, सिंदूर, काजल, हेयर ऑयल, साबुन समेत अन्य सभी चीजें मिलेंगी। कोल्हान में सौंदर्य सामग्री जंगली उत्पादों से बनती हैं। नीम, गुलाब, तुलसी, हल्दी, काजल के लिए कपड़ा और करंज तेल समेत अन्य का इस्तेमाल किया जाता है।

सिसल पत्ते की चटाई और डोकरा

नदी किनारे पाए जाने वाले गोंदा घास से महिलाओं ने कोस्टर, चटाई, डोकरा, पेपर मैसी, वॉल हैंगिंग आदि का स्टॉल बनाना शुरू कर दिया है। घोड़ाबांधा की देवला मुर्मू के अनुसार सभी उत्पाद महिलाएं हाथ से बनाती है। गोंदा पत्ता लाने के लिए नदी किनारे जाना पड़ता है।

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  • Web Title:Thousand Colors of kolhan will appear in surajkund Fair