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कस्तूरबा की निविदा शर्त बदलने का मामला गरमाया, प्रदर्शन

हिन्दुस्तान टीम,जमशेदपुरNewswrap
Fri, 22 Oct 2021 05:21 PM
कस्तूरबा की निविदा शर्त बदलने का मामला गरमाया, प्रदर्शन

कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में सामग्री क्रय हेतु निकाली गई निविदा में अचानक शर्तों में फेरबदल का मामला गरमाने लगा है। गुरुवार को इसको लेकर कई निविदाकर्ता जिला शिक्षा अधीक्षक कार्यालय पहुंच गए और निविदा में किसी खास को लाभ पहुंचाने की नीयत से फेरबदल का आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन किया।

उनका आरोप है कि निविदा शर्तों में अचानक फेरबदल इसलिए किया गया, ताकि गणेश भंडार, बीके कॉरपोरेशन, सूरज अग्रवाल, परवाल ब्रदर्स, कमला इंडस्ट्रीज, श्री बालाजी ट्रेडर्स जैसे छोटे कारोबारी टेंडर प्रक्रिया में भाग न ले सकें। इन फर्म के प्रोपराइटर गुरुवार को डीईओ से मामले की शिकायत करने पहुंचे। शिकायत में कहा गया कि कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय व अन्य विद्यालयों में सामग्री क्रय हेतु झारखंड शिक्षा परियोजना पूर्वी सिंहभूम द्वारा इस साल के मार्च में निविदा आमंत्रित की गई थी, लेकिन अचानक किन्हीं कारणों से उसे रद्द कर फिर से 28 सितंबर 2021 तक निविदा आमंत्रित की गई। नई निविदा में बेवजह कई शर्तों को बदल दिया गया। शर्तों में फेरबदल को देख छोटे व मध्य निविदा दाताओं को शक हुआ, क्योंकि इसकी शर्तें ऐसी थीं कि कोई बड़ा फर्म ही इस निविदा को भर सकता था। शर्त में पहला बदलाव अग्रधन राशि को लेकर किया गया। पहले इसी निविदा के लिए तीन लाख की अग्रधन राशि तय थी, जिसे बढ़ाकर आठ लाख कर दिया गया। निविदा भरने वालों के लिए यह भी शर्त लगा दी गई कि जो भी निविदा भरेंगे, उनका विगत तीन वित्तीय वर्षों का कुल औसत टर्नओवर नौ करोड़ रुपये होना चाहिए। नौ करोड़ की राशि की अनिवार्यता देख छोटे निविदादाता समझ गए कि बड़ी मछली को लाभ पहुंचाने के लिए ऐसा किया गया, ताकि बाकी लोग रेस से पहले ही बाहर हो जाएं।

कोरोना में पहले ही हालत खराब

निविदादाताओं ने शिकायत की कि पहले ही कोरोना के कारण उनकी हालत खराब है। अब निविदा शर्त बदलकर उनको रेस से बाहर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि दस वर्षों से स्कूलों में सामग्री क्रय-सप्लाई का काम कर रहे हैं, ऐसे में उन्हें रेस से बाहर करना सोची समझी साजिश लग रही है और किसी को लाभ पहुंचाने की कोशिश लगती है। उन्होंने कहा कि सरायकेला व पश्चिमी सिंहभूम में निविदा शर्तें पुरानी ही हैं, लेकिन पूर्वी सिंहभूम में इसे बदलना शक पैदा करता है।

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