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पत्थलगड़ी की व्याख्या गलत की जा रही है : अश्विनी

झारखंड मुक्ति वाहिनी, एसयूसीआई, विस्थापन विरोधी एकता मंच, नव जनवादी चेतना मंच, अखिल भारतीय झाड़खण्ड पार्टी के संयुक्त तत्वाधान में जाहेरथान, करनडीह में संविधान के आदिवासी विषयक प्रावधान एवं उन पर सरकार की भूमिका पर एक दिवसीय विचारसभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता झाड़खंडी चिंतक अश्वनी कुमार पंकज ने बताया कि आदिवासियों के संरक्षण के लिए जो कानून बनाया गया वह निष्क्रिय है। पत्थलगड़ी के माध्यम से देश में पांचवी अनुसूची एक बहस का विषय बना। हर आंदोलन में कमियां-खामिया होती है। इस पर विचार किया जाना चाहिए। पत्थलगड़ी को न तो सरकार और न ही कोई प्रशासनिक अधिकारी और न ही राज्यपाल ने इसे असंवैधानिक कहां। सबका कहना है इसका व्याख्या गलत किया जा रहा है। साथ ही सवाल उठाया कि चीफ जस्टिस इसका सही व्याख्या क्यों नहीं करते। संभु महतो ने कहां कि जब एक वकील कानून का व्याख्या गलत करता है तो जज उसे संसोधन कर के फैसला सुनाता है लेकिन जब आदिवासी लोग इसका व्याख्या गलत कर रहे है तो उन्हें देशद्रोह करार दिया जा रहा है। यह को गलत है। कार्यक्रम में रांची, जमशेदपुर के अलावे ग्रामीण इलाके के सैकड़ो प्रतिभागियों ने भाग लिया। सभी वक्ताओं ने एक स्वर में कहां कि पत्थलगड़ी द्वारा जारी घोषणाओं में कुछ गड़बड़ी हो सकती है, लेकिन असंवैधानिक नहीं है। कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सियाशरण शर्मा, मंथन, कुमारचंद मार्डी, सुमित राय, दीपक रंजीत, मदन मोहन, डॉ राम कवीन्द्र, सोहन महतो आदि का योगदान रहा।

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  • Web Title:The interpretation of Pathholdi is being misunderstood