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वो चार चीजें जिसे जहांगीर रतनजी दादाभाई टाटा ने बनाया मुमकिन

जहांगीर रतनजी दादाभाई टाटा (जेआरडी टाटा)। देश के उद्योग जगत का एक ऐसा नाम जिनके परिवार ने भारत में औद्योगिक क्रांति की नींव रखी। इनके बिना भारतीय उद्योग जगत का इतिहास लिखा जाना असंभव है। 29 जुलाई को ही इनकी 114वीं वर्षगांठ मना रहे हैं। कौन जानता था कि फ्रांस में जन्मा एक शख्स पूरी दुनिया के लिए किंवदंती बन जाएगा। उनकी मां एक फ्रांसीसी और पिता पारसी थे। व्यापार तो जैसे इनके खून में था। 29 जुलाई 1904 में जेआरडी टाटा का जन्म हुआ। 29 नवंबर 1993 में हुए उनके देहावसान के पहले इन्होंने देश-दुनिया के लिए इतना कुछ कर गए कि इनकी जीवन दूसरों के लिए प्रेरणा का प्रतीक बन गया। मात्र 34 वर्ष की उम्र में 26 जुलाई 1938 में ये टाटा समूह के चेयरमैन बने। इनके नेतृत्व में 62 करोड़ की टाटा समूह 10 हजार करोड़ की परिसंपत्ति बनी। वर्ष 1925 में जेआरडी टाटा ने टाटा संस में बतौर ट्रेनी ज्वाइन किया। यहां वे बारह वर्षों तक बिना किसी मेहनताने के काम किया। जहां आगे चलकर पूरे समूह के मुखिया भी बने। इस बीच वे अलग-अलग भूमिकाओं में काम सीखते रहें। अपने प्रशिक्षण से पहले जेआरडी टाटा ने अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद फ्रांस में एक वर्ष तक बतौर रिक्रूट काम किया। देशी कंपनियों में कर्मचारी भविष्य निधि योजना (पीएफ) और कर्मचारियों को मेडिकल सुविधा जेआरडी टाटा की ही देन है। जेआरडी टाटा देश के पहले कॉमर्शियल पायलट थे। इन्होंने ही पहली बार 1932 में हवाई डाक सेवा की भी शुरुआत करते हुए एयरमेल को मुंबई से करांची पहुंचाया। इसके बाद ही देश में पहले इंडियन एयर जो बाद में एयर इंडिया बना। 10 फरवरी 1929 में इन्हें कॉमर्शियल पायलट का लाइसेंस मिला था। जेआरडी टाटा ने ही टाटा मेमोरियल सेंटर ऑफ कैंसर रिसर्च एंड ट्रीटमेंट की स्थापना की। ये एशिया का पहला सर्वाधिक सुविधाओं वाला कैंसर अस्पताल था। इस अस्पताल की सुविधाओं का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अस्पताल का अपने मरीजों को स्वस्थ्य करने का आंकड़ा 99 प्रतिशत का है। देश में रिस्टवॉच निर्माण में टाइटन इंगेज के पहले ऑल्विन और एचएमटी का नाम आता है। लेकिन जेआरडी टाटा की पहल पर इनकी कंपनी ने सबसे पहली पतली वाटर प्रूफ घड़ी बनाई। इस हाथ घड़ी का डायल महज 1.15 एमएम और केस के साथ 3.5 एमएम का था। जेआरडी टाटा ने ही 1952 में देश का पहला कॉस्मेटिक ब्रांड लैक्मे की शुरुआत की। देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की ख्वाहिश पर टाटा ने इसकी शुरुआत की। इसका नाम प्रसिद्ध फ्रेंच ऑपेरा लैक्मे के नाम पर रखा गया। इसका हिंदी में अर्थ होता है लक्ष्मी जो धन संपत्ति की देवी हैं।

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  • Web Title:The four things that JRD Tata made possible