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6 जुलाई, 2020|4:04|IST

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चरमराया नक्सलियों का आर्थिक ढांचा, जानिये क्या है कारण

चरमराया नक्सलियों का आर्थिक ढांचा, जानिये क्या है कारण

लॉकडाउन में निर्माण कार्य ठप होने के चलते लेवी में गिरावट आने से नक्सलियों में बौखलाहट बढ़ गई है। उनका आर्थिक ढांचा चरमराने लगा है। साथ ही पुलिस की सख्ती बढ़ने से वे अपना दबदबा कायम रखने के लिए ग्रामीणों की लगातार हत्या कर रहे हैं। लॉकडाउन के कारण भाकपा माओवादियों को लेवी नहीं मिल रही। ऐसे में आर्थिक तौर पर नक्सलियों की कमर टूट गई है। भाकपा माओवादी लेवी नहीं मिलने के कारण वाहनों में आगजनी की घटना को अंजाम दे रहे हैं। कोल्हान से सालाना लगभग 15-20 करोड़ रुपये लेवी की जगह वसूली शून्य लगभग है। लॉकडाउन में लेवी नहीं मिलने पर नक्सलियों ने कई ठेकेदारों, सरकारी निर्माण कार्य से जुड़े लोगों को फरमान भी जारी किया है। यही वजह भी है कि माओवादी वारदातों में लॉकडाउन के बाद भी औसत गिरावट नहीं आई है। उधर, पुलिस ने भी नक्सलियों के खिलाफ सख्ती बढ़ाई है। इस साल में मुठभेड़ में चार नक्सलियों को मार गिराया गया है। इनमें एरिया कमांडर दीनू उरांव, सोना मांझी, सुनिका चांपिया, शांति पूर्ति शामिल हैं। इस साल अब तक 17 बड़े नक्सलियों की गिरफ्तारी हुई है। बीते साल पुलिस ने 24 उग्रवादियों को गिरफ्तार किया था। लॉकडाउन में नक्सलियों ने की हत्या :लॉकडाउन के दौरान 24 मई को सरायकेला जिले के खरसावां थाना क्षेत्र में मंगल सरदार और उसकी पत्नी लखमनी की गोली मारकर हत्या कर दी गई। वहीं, 20 अप्रैल को पश्चिम सिंहभूम के सोनुवा थाना इलाके राजकिशोर और 28 मार्च को हरता पंचायत में नयमन बूढ़ की पुलिस मुखबिरी के आरोप में नक्सलियों ने गला रेतकर हत्या कर दी थी। कोल्हान के डीआईजी राजीव रंजन सिंह का कहना है कि ग्रामीणों को पुलिस मुखबिर बताकर हत्या करना नक्सलियों की पुरानी रणनीति है। हत्या का कारण जो भी हो, पर उसे मुखबिर बता दिया जाता है। यह ग्रामीणों को भी सोचने का विषय है कि उनकी हत्या कौन कर रहा ह, उसका क्या फायदा होगा। नक्सलियों के खिलाफ लगातार अभियान चल रहा है और जल्द ही परिणाम सामने आयेगा।

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  • Web Title:The economic structure of Naxalites broke know what is the reason