
पाणिनि उत्सव में पदार्थ और विचार के समन्वय पर हुई चर्चा
जमशेदपुर के विधायक सरयू राय ने कहा कि पूरब और पश्चिम के बीच वैज्ञानिक और आध्यात्मिक साम्य स्थापित हो रहा है। पाणिनि उत्सव में उन्होंने महर्षि पाणिनि के योगदान की सराहना की और कहा कि बच्चों में वैज्ञानिक सोच और सृजनात्मकता विकसित करने की आवश्यकता है। कार्यक्रम में पाणिनि फाउंडेशन की निदेशक रमा पोपली की पुस्तक का विमोचन भी हुआ।
जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने कहा है कि अब ऐसा प्रतीत होने लगा है कि पूरब और पश्चिम के बीच वैज्ञानिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से साम्य स्थापित होने जा रहा है। पहले दोनों के बीच असमानता पदार्थ और विचार के आधार पर थी और एक-दूसरे पर हावी होने की प्रवृत्ति थी, लेकिन अब यह भाव धीरे-धीरे समाप्त हो रहा है। सरयू राय न्यू बाराद्वारी स्थित पीपुल्स एकेडमी के कालिदास सभागृह में पाणिनि उत्सव समिति के तत्वावधान में आयोजित पाणिनि उत्सव में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि महर्षि पाणिनि के काल से लेकर आज तक कई युग बीत चुके हैं, जिनमें आचार-विचार के स्तर पर बड़े परिवर्तन आए हैं।
कार्यक्रम में पाणिनि फाउंडेशन की निदेशक रमा पोपली ने कहा कि हमारी वर्णमाला की शुरुआत पाणिनि से होती है और आज के दौर में बच्चों के भीतर वैज्ञानिक सोच, सृजनात्मकता और संतुलित टेम्परामेंट विकसित करने की आवश्यकता है। डॉ. मित्रेश्वर अग्निहोत्री ने कहा कि महर्षि पाणिनि केवल व्याकरणाचार्य नहीं, बल्कि महाकवि, महाइतिहासकार और प्रकांड विद्वान थे। उनके बिना संस्कृत आज जिस रूप में है, वह संभव नहीं होता और अनेक भाषाओं का अस्तित्व भी नहीं होता। पाणिनि पेडालॉजी का हुआ विमोचन मौके पर बाल मुकुंद चौधरी ने माहेश्वर सूत्रों और अष्टाध्यायी की रचना से जुड़ी कथा का उल्लेख किया। डॉ. शशि भूषण मिश्र ने कहा कि संस्कृत एक ऐसी भाषा है, जो वैदिक काल से आज तक जीवंत रही है और अनेक लिपियों में लिखी जाती रही है। ब्राह्मी लिपि में भी इसके प्रमाण मिले हैं। कार्यक्रम में डॉ. रागिनी भूषण और डॉ. कौस्तुभ सान्याल ने भी अपने विचार रखे। इस अवसर पर रमा पोपली की पुस्तक पाणिनि शिक्षाशास्त्र पाणिनि पेडालॉजी का विमोचन किया गया। मंच संचालन पाणिनि उत्सव समिति के सचिव चंद्रदीप पांडेय ने किया।

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