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सारंडा में हाथी, धनेश और पैंगोलिन संरक्षण की होगी प्राथमिकता

सारंडा में हाथी, धनेश और पैंगोलिन संरक्षण की होगी प्राथमिकता

संक्षेप:

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सारंडा के 31,468.25 हेक्टेयर क्षेत्र को वाइल्डलाइफ सेक्चुरी घोषित किया गया है। सरकार ने वन विभाग को एक व्यापक कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया है, जिसमें हाथी, हॉर्नबिल और पैंगोलिन का संरक्षण शामिल है। विशेष टीम सारंडा के पारिस्थितिक पहलुओं का अध्ययन करेगी।

Dec 09, 2025 06:38 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, जमशेदपुर
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सारंडा के 31,468.25 हेक्टेयर क्षेत्र को वाइल्डलाइफ सेक्चुरी घोषित करने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद प्रदेश सरकार व्यापक कार्ययोजना तैयार (एक्शन प्लान) तैयार करने में जुट गई है। सरकार ने वन विभाग को तत्काल प्रभाव से वैज्ञानिक, तकनीकी और जमीनी जरूरतों के अनुरूप ठोस योजना बनाने का निर्देश दिया है। इसके तहत हाथी, हॉर्नबिल(धनेश) और पैंगोलिन का संरक्षण किया जाएगा। इस कार्ययोजना के लिए कोल्हान प्रमंडल में पदस्थापित रहे अनुभवी वन अधिकारियों, पर्यावरण विशेषज्ञों और अनुसंधानकर्ताओं की एक विशेष टीम बनाई जा रही है। यह टीम सारंडा के भौगोलिक, पारिस्थितिक और सामाजिक पहलुओं का विस्तृत अध्ययन करेगी। सारंडा लंबे समय से खनन, अवैध कटान और पर्यावरणीय क्षरण की मार झेल रहा है।

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इस कारण यहां के घने साल वृक्ष, हाथी और हॉर्नबिल जैसी दुर्लभ प्रजातियां लगातार प्रभावित हुई हैं। नई योजना के तहत जंगल के क्षतिग्रस्त हिस्सों में पुनर्वनीकरण, अवैध गतिविधियों की रोकथाम और वन्यजीवों के सुरक्षित आवागमन के लिए विशेष कॉरिडोर तैयार किए जाएंगे। हाई टेक मॉनिटरिंग सिस्टम होगी योजना की एक महत्वपूर्ण विशेषता होगी हाई-टेक मॉनिटरिंग सिस्टम। इसके तहत ड्रोन सर्विलांस, सैटेलाइट इमेजिंग और जियो-फेंसिंग तकनीक का इस्तेमाल कर जंगल पर चौबीसों घंटे निगरानी रखी जाएगी। अवैध खनन या पेड़ों की कटाई की गतिविधि भी तुरंत ट्रैक की जा सकेगी। इसके अलावा जंगल में घूमने वाले हाथियों की मूवमेंट ट्रैक करने के लिए रेडियो कॉलर आधारित तकनीक भी लागू करने पर विचार हो रहा है। एक्शन प्लान में प्रभावित गांवों के लिए पुनर्वास नीति, आजीविका योजनाएं और इको-टूरिज्म के विकास का भी प्रस्ताव होगा, ताकि स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित की जा सके। यह योजना सारंडा के पुनर्जीवन का मार्ग प्रशस्त करेगी और आने वाले दशकों तक जंगल की सुरक्षा को मजबूत आधार देगी। -परितोष उपाध्याय, पीसीसीएफ, वाइल्ड लाइफ, झारखंड