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जमशेदपुर

कोचिंग के चक्कर में अटेंडेंस न छोड़ें विद्यार्थी : प्रज्ञा सिंह

हिन्दुस्तान टीम,जमशेदपुरPublished By: Newswrap
Wed, 04 Aug 2021 05:20 PM
कोचिंग के चक्कर में अटेंडेंस न छोड़ें विद्यार्थी : प्रज्ञा सिंह

दसवीं में कम अंक मिले तो विद्यार्थियों को घबराना नहीं है। जिसका रिजल्ट बेहतर हुआ है, उसे बधाई। जिनको कम अंक मिले हैं, उनके लिए चुनौतियों के अनुरूप खुद को तैयार करने का सुनहरा अवसर है। इसलिए घबराना नहीं है और पूरी ताकत से लग जाना है। अक्सर देखा गया कि जिसे 90 प्लस अंक मिले, उसे बाद में कम अंक मिले और जो 10वीं में 60 से 70% के बीच रहा है, उसने 12वीं में 90 प्लस पाया है।

यह कहना है कोल्हान की सीबीएसई की को-ऑर्डिनेटर प्रज्ञा सिंह का। उन्होंने हिन्दुस्तान से बातचीत में कहा कि हर साल ऐसा ही रिजल्ट आता है। लेकिन इस बार शिक्षकों को अधिक मेहनत करनी पड़ी क्योंकि टेबुलेशन को लेकर सभी के सामने दिक्कत थी और दिन-रात एक कर उसे पूरा किया गया। जिस तरह बोर्ड ने प्रक्रिया और साफ्टवेयर तैयार किया था, उसमें पूर्व के रिकॉर्ड के आधार और प्री बोर्ड के तहत मूल्यांकन करना आसान था।

उन्होंने कहा कि 10वीं का रिजल्ट विद्यार्थियों के लिए मंजिल की तरफ दौड़ने का संकेत है। अंकों के आधार पर बहुत दुखी और बहुत खुश होने की जरूरत नहीं है। जाहिर सी बात है कि जिनका अंक अधिक आया होगा, उसे अधिक खुशी होगी। जिसको कम अंक मिले होंगे, उसे दुखी नहीं होना है, क्योंकि उसके सामने अभी बेहतर करने का मौका है। उसे स्वयं का मूल्यांकन करना होगा कि खामी कहां रही। उसे दूर कर निरंतर दौड़ते रहना है, ताकि वह बहुत मेहनत कर परचम लहरा सके। अभी उन्हें यह समझना होगा कि 10वीं और 11वीं के रिजल्ट में बहुत अंतर होता है। 11वीं और 12वीं का स्वरूप अलग होता है। लेकिन घबराना नहीं है। इसमें छात्र अपनी मेहतन से ही स्थान बना लेता है। शुरुआती तीन से चार महीनों में विद्यार्थियों को 11वीं में पढ़ाई हो सकता है समझ नहीं आए। उसे लगेगा कि वह बेहतर नहीं कर पाएगा, लेकिन तन्मयता और कक्षाओं में उसका बिना अनुपस्थिति के रहना उसका रास्ता बहुत ही आसान कर देगा। अक्सर यह देखा जाता है कि छात्र कोचिंग के चक्कर में स्कूलों की नियमित कक्षाओं को छोड़ देते हैं। यह ऑनलाइन क्लासेज में देखने को मिला, पर इससे छात्रों का ही नुकसान होता है। छात्रों को लगता है कि कोचिंग से वह जेईई या नीट को निकाल लेगा। लेकिन ऐसा नहीं है। कक्षाओं की नियमित पढ़ाई, उसे दोनों में सफलता दिलाएगी। इनमें बेहतर करने वाले छात्रों की कई मिसाल हैं। इसलिए नियमित स्कूल की कक्षाओं को कभी न छोड़ें, क्योंकि शिक्षक उनके लिए मेहतन करते हैं। जितनी खुशी या गम आपके रिजल्ट से आपको होता है वैसा ही शिक्षकों को भी होता है। नियमित कक्षाओं के परिणाम हमेशा ही बेहतर होते हैं।

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