कोल्हान और छोटानागपुर में तालाब में नहाने से हो रही नाक की बीमारी
तालाब या पोखर में नहाने से लोगों की नाक में मस्से निकल रहे हैं, विशेषकर 14 से 40 वर्ष के लोगों में। एमजीएम अस्पताल के शोध में पाया गया है कि राइनोस्पेरियन सी बैरी नामक कीटाणु के कारण इन्फेक्शन होता...

तालाब या पोखर में नहाने से लोगों की नाक में मस्से निकल जा रहे हैं। इससे ज्यादातर गांवों के लोग प्रभावित हैं। इसे ठीक करने के लिए ऑपरेशन कराना पड़ता है। ये बातें एमजीएम अस्पताल में हो रहे एक शोध में सामने आई हैं। कोल्हान या छोटानागपुर क्षेत्र में तालाब या पोखर ज्यादा हैं। इसमें लोग नहाते हैं। तालाब में ‘राइनोस्पेरियन सी बेरी नामक कीटाणु पाए जाते हैं। इसके कारण नाक के अंदर इन्फेक्शन हो जाता है और मस्से होने लगते हैं। मस्सों के बड़े होने पर सांस लेने में दिक्कत होती है। इससे खून भी निकलने लगता है। एमजीएम के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रोहित ने बताया कि इस तरह के मामले में ऑपरेशन ही एकमात्र उपाय है। एमजीएम में दूरबीन और अन्य उन्न्त मशीन से ऑपरेशन होता है। यदि ऑपरेशन अच्छे से नहीं किया जाएगा या जड़ तक मस्सा को नहीं निकाला जाएगा तो वह फिर से बढ़ जाएगा। एमजीएम में आईसीएमआर नई दिल्ली द्वारा एमआरयू द्वारा की ओर से शोध के लिए 2022 में प्रोजेक्ट मिला था। इसमें एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. निहार टोप्पनो और असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रोहित झा शोध कर रहे हैं। शोध विभागाध्यक्ष डॉ. संजय कुमार के नेतृत्व में किया जा रहा है।
14 से 40 वर्ष के लोगों में ज्यादा समस्या
यह समस्या 14 से 40 वर्ष तक के लोगों में ज्यादा होती है। दरअसल, गांव में इस उम्र के लोग ही ज्यादातर तालाब में नहाते हैं। डॉ. रोहित ने बताया कि इस क्षेत्र में काम नहीं हुआ है। इसलिए अध्ययन किया जा रहा है। आगे गांवों में कैंप लगाकर इलाज करने की योजना है। बताया कि एक महीने में सात से आठ केस आते हैं। यानी साल में 70 से 80 केस आते हैं। इसमें एक साल में करीब 50 ऑपरेशन हो चुके हैं।
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