संदिग्ध लेनदेन वाले खातों को अब बैंक कर सकेंगे अनफ्रीज
साइबर ठगी और संदिग्ध लेनदेन के मामलों में फ्रीज किए गए बैंक खाताधारकों को राहत मिलेगी। नई एसओपी के तहत, 50 हजार रुपये तक की राशि वाले फ्रीज खातों को बैंक स्वयं अनफ्रीज कर सकेंगे, जिससे खाताधारकों को अदालतों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। इससे मामलों का त्वरित निपटारा संभव होगा।

साइबर ठगी और संदिग्ध लेनदेन के मामलों में फ्रीज किए गए बैंक खाताधारकों को अब राहत मिलने जा रही है। नई एसओपी लागू होने के बाद 50 हजार रुपये तक की राशि वाले फ्रीज खातों को बैंक स्वयं अनफ्रीज कर सकेंगे। इससे खाताधारकों को खाते चालू कराने के लिए अदालतों और विभिन्न जिलों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। अबतक किसी खाते के साइबर ठगी या संदिग्ध लेनदेन से जुड़ने पर उसे फ्रीज कर दिया जाता था। खाते को अनफ्रीज कराने के लिए संबंधित खाताधारक को उस जिले की अदालत या पुलिस कार्यालय में जाना पड़ता था, जहां से खाते को फ्रीज करने का आदेश जारी किया जाता था। कई बार दूसरे राज्यों और दूर-दराज के जिलों तक जाना पड़ता था, जिससे लोगों को आर्थिक और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ता था。
नई व्यवस्था
नई व्यवस्था में जीआरएम और एमआरएम मॉड्यूल लागू किए गए हैं। इनके माध्यम से बैंक और पुलिस के बीच समन्वय बेहतर होगा तथा खातों की जांच और निस्तारण की प्रक्रिया तेज होगी। यदि फ्रीज खाते में संदिग्ध राशि 50 हजार रुपये तक है और जांच में खाताधारक की संलिप्तता नहीं पाई जाती है, तो बैंक निर्धारित प्रक्रिया के तहत खाते को अनफ्रीज कर सकेंगे।
प्रारंभिक जांच प्रक्रिया
नई एसओपी के अनुसार, संबंधित पुलिस इकाई को खाते से जुड़े मामले की प्रारंभिक जांच कर एक सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट बैंक को उपलब्ध करानी होगी। रिपोर्ट के आधार पर बैंक आवश्यक कार्रवाई करेंगे। इससे लंबित मामलों का त्वरित निपटारा संभव हो सकेगा और निर्दोष खाताधारकों को राहत मिलेगी।
मामलों की संख्या
साइबर थाने में हर माह करीब 50 ऐसे मामले आते हैं
जमशेदपुर साइबर थाने में औसतन हर महीने करीब 50 ऐसे मामले सामने आते हैं, जिनमें बैंक खातों को फ्रीज किया जाता है। इनमें कई मामलों में खाताधारक अनजाने में संदिग्ध लेनदेन की चपेट में आ जाते हैं और उन्हें लंबे समय तक अपने ही खाते के उपयोग से वंचित रहना पड़ता है।
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अनफ्रीज प्रक्रिया
नई एसओपी लागू होने पर पुलिस को आवेदन प्राप्त होता है। जांच में अगर त्रुटि नहीं पाई गई तो बैकों को क्लीन चिट दिया जाता है। इसके बाद संबंधित बैंक खाते को अनफ्रीज कर सकते हैं।
-मनोज ठाकुर, प्रभारी डीएसपी साइबर
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