कोल्हान के जंगलों और मैदानों में दिख रहे दुर्लभ पक्षी

Jan 18, 2026 02:42 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, जमशेदपुर
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महाराष्ट्र के पुणे जिले के भीगवान क्षेत्र से दुर्लभ भारतीय कर्सर का पलायन कोल्हान अंचल की ओर शुरू हो गया है। निर्माण कार्य और भू-दृश्य में बदलाव के कारण भीगवान अब इस पक्षी के लिए अनुकूल नहीं रहा। कोल्हान के जंगल और घास के मैदान भारतीय कर्सर के लिए आदर्श है, जो कृषि क्षेत्रों के लिए भी फायदेमंद है।

कोल्हान के जंगलों और मैदानों में दिख रहे दुर्लभ पक्षी

महाराष्ट्र के पुणे जिले के भीगवान क्षेत्र से दुर्लभ भारतीय कर्सर का पलायन अब कोल्हान अंचल की ओर होने लगा है। भीगवान में लगातार बढ़ते निर्माण कार्य और बदलते भू-दृश्य के कारण वहां का परिवेश अब इस पक्षी के अनुकूल नहीं रहा। इसके विपरीत, कोल्हान के जंगल-झाड़, बंजर भूमि और घास के मैदान भारतीय कर्सर को खूब रास आ रहे हैं। जीव-जंतु विज्ञान पर शोध कर रहे विद्यार्थियों ने इसकी तस्वीरें कैमरे में कैद की हैं। भारतीय कर्सर, जिसे हिंदी में ‘धाविक’ या ‘सामान्य नुकरी’ भी कहा जाता है, सूखे और खुले क्षेत्रों का पक्षी है। यह घनी झाड़ियों या जंगलों के बजाय कम ऊंचाई वाली घास, पथरीली और सूखी जमीन को पसंद करता है।

गम्हरिया के घास के मैदान इसके लिए आदर्श माने जा रहे हैं, जहां खुले विस्तार में यह उड़ने की बजाय जमीन पर दौड़कर शिकार करता है और खतरे से बचाव करता है। खास बात यह है कि यह पक्षी पेड़ों पर नहीं, बल्कि जमीन पर छोटे गड्ढे बनाकर अंडे देता है। घास के मैदानों का स्वास्थ्य सूचक है कर्सर पारिस्थितिकी विशेषज्ञों के अनुसार, भारतीय कर्सर को घास के मैदानों का स्वास्थ्य सूचक माना जाता है। इसकी उपस्थिति यह संकेत देती है कि संबंधित क्षेत्र का ग्रासलैंड इकोसिस्टम अब भी जीवित है। यह पक्षी टिड्डी, दीमक, भृंग जैसे कीटों को खाकर प्राकृतिक कीट नियंत्रण में अहम भूमिका निभाता है, जिससे कृषि क्षेत्रों को भी लाभ मिलता है। उत्कृष्ट हैबिटेट का है संकेत संरक्षण जीवविज्ञानी प्रोसेनजीत सरकार के अनुसार, विभिन्न प्राणियों की मौजूदगी उत्कृष्ट हैबिटेट का संकेत है। सीतारामपुर जलाशय, उससे जुड़ी घासभूमि और वनस्पतियां मिलकर एक दुर्लभ व संतुलित पारिस्थितिकी तंत्र बनाती हैं। इसके संरक्षण में ग्रामीणों और प्रशासन की भागीदारी जरूरी है, क्योंकि प्रकृति सुरक्षित रहेगी तभी मानव जीवन भी सुरक्षित रहेगा। ------ भारतीय कर्सर का गम्हरिया में दिखना इस बात का प्रमाण है कि कोल्हान की जैव विविधता अब भी समृद्ध है। जरूरत है तो बस इसके प्राकृतिक आवासों के संरक्षण की। -सबा आलम अंसारी, डीएफओ, जमशेदपुर वन प्रमंडल

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