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रमजान के छूटे रोजे दूसरे महीने में जल्दी रख लेना चाहिए

रमजान की मजहबी समस्याओं और शरई समाधान के लिए हिन्दुस्तान ने बुधवार को ऑनलाइन रमजान काउंसिलिंग कराया। इसमें पाठकों ने साबरी मस्जिद बगानशाही के इमाम मौलाना सगीर आलम फैजी से सवाल पूछे और उनके जवाब जाने। प्रस्तुत हैं कुछ सवाल और उसके जवाब। सवाल : इफ्तार की दुआ इफ्तार से पहले या बाद में पढ़नी चाहिए? जवाब : इफ्तार की दुआ इफ्तार के बाद पढ़ी जाए। लेकिन, अगर कोई पहले भी पढ़ ले तो कोई हर्ज नहीं है। सवाल : रमजान का रोजा कजा (छूट) हो जाए तो कब रखा जाएगा? जवाब : रमजान का रोजा छूट जाए तो उसे किसी भी दूसरे माह में रख सकते हैं। लेकिन, जितनी जल्दी हो सके, रख लेना चाहिए। सवाल : फिदिया का मतलब क्या है? जवाब : फिदिया का मतलब एक रोजा के बदले एक मिस्कीन को दो वक्त खाना खिलाना है। कोई व्यक्ति इतना बुजुर्ग और कमजोर हो जाए कि रोजा रखने की ताकत नहीं हो तो फिदिया देगा। सवाल : क्या औरतों को भी तरावीह की नमाज पढ़नी होगी? जवाब : जी हां, औरतों को तरावीह की नमाज पढ़नी चाहिए। बेहतर है कि घर पर पढ़ें। सवाल : जकात कितना निकाली जाती है? जवाब : साढ़े सात तोला सोना या साढ़े बावन तोला चांदी या उसकी कीमत पर एक साल गुजर जाए तो उसका 2.5 फीसदी जकात निकालना होगा। सवाल : क्या नाबालिग पर भी जकात फर्ज है? जवाब : नहीं नाबालिग पर जकात निकालना फर्ज नहीं है। इन्होंने पूछे सवाल : अनवर हुसैन-बिष्टूपुर, सालेहा खातून-आजादनगर, अहमद रजा- आजादनगर, मुसर्रत रजा- मानगो, सलामत हुसैन-जाकिरनगर, जकिया शाहीन-मुंशी मोहल्ला, मौसमी महतो, पपाई चक्रवर्ती -कदमा।

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  • Web Title:Ramadan's roasting must be kept early in the second month.