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6 अगस्त, 2020|6:22|IST

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रेलवे कर्मचारी नहीं रहना चाहते हैं सरकारी क्वार्टर में, जानिये क्या है वजह

रेलवे कर्मचारी नहीं रहना चाहते हैं सरकारी क्वार्टर में, जानिये क्या है वजह

रेलवे कर्मचारियों के लिए सरकारी आवास अब किराए के मकान से भी महंगा पड़ रहा है। यही वजह है कि सातवें वेतन आयोग में एचआरए बढ़ने के बाद कई कर्मचारियों ने आवास खाली करने के लिए आवेदन दिया है। सातवां वेतन आयोग लागू होने के बाद रेलवे कर्मचारियों का सरकारी आवास में रहना घाटे का सौदा साबित हो रहा है। अभी सरकारी आवास लेने पर कुल वेतन का 10 प्रतिशत एचआरए देना पड़ता है। जैसे की किसी कर्मचारी का मूल वेतन 60 हजार है तो उसे छह हजार रुपये एचआरए देना पड़ता है। बिजली का बिल अतिरिक्त। मगर, सातवें वेतन आयोग ने स्टेशन की श्रेणी के हिसाब से आठ, सोलह और चौबीस प्रतिशत एचआरए देने का एलान किया है। इस हिसाब से अब कर्मचारियों को सरकारी आवास लेने पर दस हजार रुपये से ऊपर ही देना होगा। इससे कम में उन्हें निजी आवास किराए पर मिल रहा है। फिलहाल मंडल में 50 से अधिक कर्मचारियों ने आवास खाली करने के आवेदन दे रखे हैं। ये भी समस्या : रेलवे कालॉनी में बने 2800 रेलवे क्वार्टर में से 419 क्वार्टर तोड़ दिया गया है, जबकि लगभग 2400 में से 1200 क्वार्टर खाली हैं। क्वार्टर में रहने वाले कर्मचारी भी समस्याओं से जूझ रहे हैं। इन आवासों में न तो समुचित सफाई की जा रही है और न ही स्वच्छ जलापूर्ति हो पाती है। वहीं, दक्षिण पूर्व रेलवे मेंस कांग्रेस के को-आर्डिनेटर शशि मिश्रा ने बताया कि सातवां वेतन आयोग लागू होने के बाद से रेलवे टाटानगर के कर्मचारियों को 16 प्रतिशत एचआरए मिलता है, आवास लेने पर एलाउंस रुक जाता है और आवास का किराया के साथ बिजली बिल का अतिरिक्त भुगतान करना पड़ता है। इस सिलसिले में नियम पर दोबारा विचार करने का प्रस्ताव दिया गया है।

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  • Web Title:Railway employees do not want to stay in government quarters know what is the reason