
पोटका सबसे अधिक राजस्व देता है, फिर भी डीएमएफटी फंड कम : विधायक
पोटका के विधायक संजीव सरदार ने डीएमएफटी फंड के असमान वितरण पर चिंता जताई। उन्होंने स्थानीय जरूरतों को प्राथमिकता देने की बात की। उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी ने खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए...
पोटका के विधायक संजीव सरदार ने कहा कि पोटका में सबसे अधिक खनन होता है और वह राजस्व भी अधिक देता है। परंतु उस अनुपात में पोटका को डिस्ट्रिक्ट मिनरल्स फाउंडेशन ट्रस्ट (डीएमएफटी) फंड नहीं दिया जा रहा है। वे डीएमएफटी की शासी परिषद की टाउन हॉल में सोमवार को आयोजित बैठक को संबोधित कर रहे थे। उनकी बात को ही पोटका की एक मुखिया ने भी उठाया और अपनी शिकायत दर्ज कराई। विधायक समीर मोहंती ने कहा कि डीएमएफटी की योजनाएं तभी सफल होंगी, जब स्थानीय जरूरतों को प्राथमिकता में रखकर कार्य किया जाए। उन्होंने भवनहीन स्कूल, आंगनबाड़ी केन्द्र, पेयजल से संबंधित योजनाओं पर विशेष बल देने की बात कही।

उपायुक्त सह डीएमएफटी की शासी परिषद के अध्यक्ष कर्ण सत्यार्थी ने कहा कि डीएमएफटी निधि का उद्देश्य खनन प्रभावित क्षेत्रों के सर्वांगीण विकास है। ऐसे में प्रत्येक योजना का लाभ लक्षित समुदाय तक पारदर्शी एवं त्वरित रूप से पहुंचे, यह सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है। डीडीसी नागेन्द्र पासवान ने योजनाओं की निगरानी व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाने पर बल दिया। उन्होंने बताया कि जिला में प्रत्यक्ष रूप से 196 एवं अप्रत्यक्ष रूप से 19 खनन प्रभावित पंचायतें हैं। वर्तमान में जिले में कुल 14,169 योजनाएं ली गई हैं जिनमें 9,675 योजनाओं को लागू किया गया है। एक मुखिया ने मुद्दा उठाया कि वे सभी भाजपा सरकार के समय ही बहुत सी योजनाएं पारित कर भेज चुकी हैं। हालांकि फिर से वही कवायद कराई जा रही है। तब डीडीसी ने कहा कि वे अपनी प्राथमिकताएं बताया करें, उसी योजना को शामिल किया जाएगा। बैठक में जेएनएसी के उप नगर आयुक्त कृष्ण कुमार, जिला शिक्षा पदाधिकारी मनोज कुमार सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।

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