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जमशेदपुरकिसी की हजामत बनाओ तो पुलिस पकड़ लेती है

हिन्दुस्तान टीम,जमशेदपुरPublished By: Newswrap
Mon, 24 Aug 2020 05:13 PM
किसी की हजामत बनाओ तो पुलिस पकड़ लेती है

लॉकडाउन के चलते पिछले पांच माह से सैलून संचालकों की स्थिति बदतर है। उनका कहना है कि उन्हें यही काम आता है और इसका प्रशिक्षण लिया है। अब कोई दूसरा काम वे सीखें तो कैसे। स्थिति यह है कि सैलून बंद होने के बाद यदि हम बाहर भी कोई काम करते हैं तो उन्हें पकड़कर पुलिस ले जाती है। पुलिस के मुखबिर घूम-घूम कर सैलून के खुलने या काम होने की जानकारी पुलिस को जाकर देते हैं और वही मुखबिर बाद में उनसे पैसे भी वसूलते हैं। लिहाजा, स्थिति यह हो गई कि यदि चोरी-छुपे कोई काम कर भी लिया तो जितना का काम करता नहीं है, उससे ज्यादा पैसे पुलिस को या मुखबिर को खिलाने पड़ते हैं। इससे सैलून संचालकों की स्थिति इतनी बदतर हो गई है। घर में रोटी के लाले तक पड़ने लग गए हैं। दूसरों को तो राशन व दूसरे सामान जनप्रतिनिधि मुहैया करा दे रहे हैं, लेकिन उन्हें कोई पूछने वाला नहीं है। पिछले पांच महीने से उन लोगों पर हजारों रुपये कर्ज हो गया है और अब कोई उधर में पैसे देने वाला भी नहीं बचा है। कई ऐसे परिवार हैं, जिन्होंने अपने गहने और दूसरे सामान बंधक कर रख दिए हैं। जितना दबाव उन पर इन पांच महीनों में पड़ा है, सैलून खुलने के बाद भी उस कर्ज की अदायगी में और पांच महीने लग जाएंगे।

पार्लर संचालक दिलीप चौधरी के अनुसार कोल्हान में छोटे-बड़े सैलून और पार्लर मिलाकर 3200 दुकाने हैं, जिसमें लगभग 10 हजार से ज्यादा लोग काम करते हैं। पांच महीने से एक भी काम किसी के पास नहीं है। आप अनुमान लगा सकते हैं कि एक कर्मचारी के घर की स्थिति अभी क्या होगी। श्याम नरेश ठाकुर ने आर्थिक तंगी के चलते आत्महत्या की है। उसकी विधवा को सरकार को मुआवजा देना चाहिए। नाई समाज जागृति मंच के प्रभात कुमार के अनुसार निश्चित ही आत्महत्या करने वाले श्याम नरेश ठाकुर के परिवार को मुआवजा मिले। इस विकट घड़ी में कई घर ऐसे हैं, यहां चूल्हा तक नहीं चल पा रहा है। जब सरकार ने सभी तरह के काम को छूट दे दी है तो सलून और नाई के लिए भी कोई पैमाना तय कर दे और यदि उसका पालन वे नहीं करते हैं, तब उनके खिलाफ लॉकडाउन उल्लंघन की कार्रवाई करे। बिना कोई राहत सामग्री या फिर मदद किए किसी के काम को पूरी तरह से बंद करा देना, वह भी पांच महीने तक, यह कहां का इंसाफ है।

अखिल भारतीय नाई संघ के संरक्षक राम उदय ठाकुर ने बताया कि लोग अपने गांव छोड़कर यहां बसे हुए हैं। कर्ज के बोझ से एक-एक नाई दब गया है। अब तो दुकान वाले उधार में राशन भी नहीं दे रहे हैं। जिन्होंने कर्ज दिया है, वे अपना पैसा मांग रहे हैं। पूरा नाई समाज मानसिक यंत्रणा में जी रहा है। उनके सामने भूखे मरने की नौबत आ गई है। उन्होंने श्याम ठाकुर के परिवार को मुआवजा देने की मांग सरकार से की है।

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