Planning in paper poor people are stuck on the road - कागजों में योजना, सड़क पर ठिठुर रहे गरीब DA Image

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कागजों में योजना, सड़क पर ठिठुर रहे गरीब

कागजों में योजना, सड़क पर ठिठुर रहे गरीब

कड़ाके की ठंड में कंबल बांटना तो दूर गरीब बेघरों के लिए कोई विंटर एक्शन प्लान नहीं बनाया गया है। गरीब भीषण ठंड में कहां बसेरा करेंगे, इसका कोई स्पष्ट जवाब निकायों के पास नहीं है। हाल के दिनों में सुप्रीम कोर्ट ने शहरी बेघर गरीबों के लिए जल्द ही एक्शन प्लान तैयार करने का आदेश दिया था, जिससे इनको राहत मिल सके। शहर में लगातार तापमान गिरता जा रहा है। व्यवस्था के नाम पर रैन बसेरा खोल दिए गए हैं, लेकिन वहां गरीबों के रहने के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। ठहरने वाले इक्का-दुक्का लोग अपनी व्यवस्था लेकर आते हैं। नहीं हुईं ये व्यवस्थाएं : रैन बसेरा, बस स्टैंड, बाजार, रेलवे स्टेशन के समीप अलाव की व्यवस्था नहीं है। कंबल बांटने के लिए जिले को फंड मिल गया और कंबल खरीदने की टेंडर प्रक्रिया शुरू की गई है। जिला प्रशासन की मानें तो 12 दिसंबर के बाद कंबल बंटना आरंभ हो जाएगा। अस्पतालों में ठंड से पीड़ित मरीजों के लिए विशेष व्यवस्था नहीं है। कुहासे से निपटने के लिए हाइवे पर ट्रैफिक की व्यवस्था नहीं है। ठंड पीड़ित लोगों पर नजर रखने के लिए पीसीआर वैन तक की व्यवस्था नहीं की गई है, जिससे किसी पीड़ित को उठाकर रैन बसेरा या अस्पताल में ले जाया जा सके। एनडीआरएफ से अब तक कोई संपर्क नहीं किया गया है। धरी रह गईं ये योजनाएं : आपदा प्रबंधन के लिए कई योजनाएं बनायी गईं, लेकिन सभी धरी की धरी रह गईं। पहले चरण में सर्वे के लिए लोगों की टीम तैयार करनी थी। इसमें पूर्व सैनिकों को शामिल किया जाना था। अभी तक न टीम बनी और न ही किसी तरह का ठोस कदम उठाया गया। जमशेदपुरअक्षेस के विशेष पदाधिकारी कृष्ण कुमार का कहना है कि रैन बसेरा खोलने से लेकर अलाव जलाने की तैयारी पूरी कर ली गई है। रैन बसेरा भी लगभग सारे खुल गए हैं। एकाध दिनों में शहर के महत्वपूर्ण चौक-चौराहों पर अलाव जलाना भी आरंभ हो जाएगा।

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