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जमशेदपुर

डायन के खिलाफ संघर्ष करने वाली सरायकेला की छुटनी को पद्मश्री अवार्ड

हिन्दुस्तान टीम,जमशेदपुरPublished By: Newswrap
Tue, 26 Jan 2021 03:16 AM
डायन के खिलाफ संघर्ष करने वाली सरायकेला की छुटनी को पद्मश्री अवार्ड

सरायकेला/ गम्हरिया। सात छऊ कलाकारों को पद्मश्री अवार्ड दिलाने वाले कलानगरी के रूप में विख्यात सरायकेला के नाम एक और पद्मश्री अवार्ड जुड़ गया। यह अवार्ड कोई कलाकार नहीं बल्कि अपने संघर्ष की बदौलत प्रताड़ित महिलाओं का सहारा बनी छुटनी महतो को मिला है।

छुटनी महतो को डायन के नाम पर घर से निकाल दिए जाने के बाद वह चुप नहीं बैठी, बल्कि डायन के नाम पर प्रताड़ित लोगों का सहारा बनीं। आज वह झारखंड ही नहीं अन्य राज्यों के प्रताड़ित महिलाओं के लिए ताकत बन चुकी हैं। लगभग 63 वर्षीया छुटनी महतो सरायकेला खरसावां जिले के गम्हरिया प्रखंड के भोलाडीह बीरबांस का रहने वाली हैं। छुटनी निरक्षर हैं परंतु हिन्दी, बांगला और ओड़िया पर उसकी समान पकड़ है।

संघर्ष से शिखर पर पहुंचने का सफर :

गम्हरिया के महताइनडीह के लोगों ने गांव में घटने वाली घटनाओं को डायन से जोड़ कर छुटनी को डायन की संज्ञा दे दी थी। ग्रामीणों ने तथाकथित तांत्रिक के कहने पर डायन के नाम पर छुटनी को मल-मूत्र पिलाया। इतना ही नहीं पेड़ से बांधकर पीटा। इसके बाद हत्या की योजना बनाने लगे। इस बात की भनक लगते ही छुटनी अपने चारों बच्चों के साथ गांव छोड़ कर भाग गयी। कुछ माह इधर-उधर गुजारने के बाद अपने मायके झाबुआकोचा पहुंची। यहां कुछ माह रहने के दौरान पति धनंजय महतो भी बच्चों को छोड़कर चला गया। छुटनी बताती हैं कि जब वह गांव वालों के खिलाफ केस करने गई तो पुलिस ने उसकी मदद नहीं की। उसके बाद छुटनी ने कुछ करने की ठानी। उन्होंने अपने जैसी पीड़ित 70 महिलाओं का एक संगठन बनाया और इस कुप्रथा के खिलाफ लड़ाई शुरू कर दी। वह गैर सरकारी संस्था आशा के संपर्क में आईं और उन्हें उनका उद्देश्य मिल गया। आज वह सरायकेला के बीरबास पंचायत के भोलाडीह में संचालित परिवार परामर्श केंद्र की संयोजिका हैं। डायन के नाम पर प्रताड़ित महिलाओं की सहायता को वह अपना धर्म मानती हैं।

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