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जमशेदपुर

पद्मश्री की सूचना मिलते ही छुटनी ने कहा- पहली बार सुना है इस अवार्ड का नाम

हिन्दुस्तान टीम,जमशेदपुरPublished By: Newswrap
Tue, 26 Jan 2021 03:16 AM
पद्मश्री की सूचना मिलते ही छुटनी ने कहा- पहली बार सुना है इस अवार्ड का नाम

सरायकेला/ गम्हरिया। अपने संघर्ष की बदौलत प्रताड़ित महिलाओं का सहारा बनी छुटनी महतो को पद्मश्री अवार्ड मिलने की सूचना सबसे पहले हिंदुस्तान ने दी। उन्होंने बताया कि इससे पहले इस पुरस्कार के बारे में वह नहीं जानती थीं। वह अवार्ड मिलने की सूचना से खुश हैं। अब वह दोगुनी खुशी व उत्साह के साथ कार्य करेंगी और जीवनपर्यंत प्रताड़ित महिलाओं के खिलाफ आ‌वाज उठाएंगी। उन्होंने कहा कि मेराय यह पद्मश्री अवार्ड मेरे साथ काम करने वाली सभी महिलाओं के मेहनत का प्रतिफल है।

उनसे लड़ाई जो महिलाओं का सम्मान नहीं करते :

छुटनी ने बताया डायन के नाम पर मैंने गहरा जख्म झेला है। चार बच्चों को लेकर घर छोड़ना पड़ा। ओझा के कहने पर ग्रामीणों ने ऐसा जुल्म किया, जिसकी कल्पना सभ्य समाज नहीं कर सकता है। पुलिस प्रशासन भी ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करती है। मैं उस असभ्य समाज से लोहा ले रही हूं, जहां नारी को सम्मान नहीं मिलता। मरते दम तक मेरा संघर्ष जारी रहेगा।

डायन प्रताड़ना को लेकर बना कानून :छुटनी की जिद ही थी कि डायन प्रताड़ना को लेकर सरकार कानून बनाने को विवश हुई और लगभग छह राज्यों में डायन प्रताडना को लेकर कानून बना। बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री राबड़ी देवी व उनके मंत्रिमंडल ने इसे कानून का शक्ल देकर डायन प्रथा के खिलाफ कानून बनाया और इसके बाद छह राज्यों में डायन प्रथा प्रतिषेध अधिनियम लागू हो गया।

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